मुरादाबाद। पहलगाम आतंकी हमले का जिस तरह सेना ने बदला ले लिया है, उस पर हमें गर्व है। हमारे जांबाजों ने पाकिस्तान सीमा के 100 किलोमीटर अंदर तक कार्रवाई की है। आज देशभर में खुशी है। यह बातें रिटायर्ड मेजर जेपी सिंह ने कहीं।
सिविल लाइंस के आवास विकास कॉलोनी में रहने वाले मेजर जेपी सिंह ने बताया कि वह 1961 से 1983 तक भारतीय सेना का हिस्सा रहे। उन्होंने अपने सेवाकाल के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि 15 दिसंबर 1971 को पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में पाकिस्तानी सेना ने मार काट शुरू कर दी थी। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के ढाका स्थित आवास को पाकिस्तानी सेना ने चारों ओर से घेर लिया था।
मेजर जेपी सिंह ने बताया कि वह अपनी टोली के साथ शेख हसीना के आवास से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर थे। उन्हें सीनियर से आदेश मिला कि परिवार को सुरक्षित निकालें। कई दिन तक लड़ाई चली। इसके बाद पाकिस्तान के जवानों ने सरेंडर कर दिया था। जिन्हें हिरासत में लेकर कैंप में रखा गया था। उस लड़ाई में भी भारतीय सेना को जीत मिली थी, लेकिन पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है।
अब पहलगाम में आतंकी हमला किया तो पूरा देश दुखी था। हर भारतीय यह ही मांग कर रहा था कि पाकिस्तान को सबक सिखाया जाए। भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुसकर कार्रवाई की है। जिससे हर भारतीय गर्व महसूस कर रहा है।
वहीं पूर्व सैनिक गजेंद्र सिंह ने भारतीय सेना की पाकिस्तान में आतंकी कैंप पर कार्रवाई से खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले का भारतीय सेना ने बदला ले लिया है। भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकी कैंप तबाह किए हैं। अगर पाकिस्तान इस पर प्रतिक्रिया देता है तो भारतीय सेना उसका मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। पाकबड़ा के गुरैठा निवासी गजेंद्र सिंह का कहना है कि वह 15 साल कश्मीर में तैनात रहे हैं। अगर उन्हें दोबारा भारत की सुरक्षा के लिए बुलाया जाए तो वह तैयार हैं।