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किसानों की हुंकार से याद आ गई 1987 की महापंचायत

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मुरादाबाद के बिलारी में सहकारी गन्ना विकास समिति परिसर में संयुक्त किसान मोर्चा की महापंचायत मे - फोटो : CITY
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मुरादाबाद। शुक्रवार को बिलारी के गन्ना समिति मैदान में हुई किसानों की महापंचायत को देखकर यहां के लोगों को वर्ष 1987 की पंचायत याद आ गई। उस वक्त इसी कस्बे के रामरतन इंटर कालेज के मैदान में भाकियू की महापंचायत हुई थी जिसमें भाकियू के संस्थापक चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत पहुंचे थे। कस्बे के बुजुर्गोें का दावा है कि उस महापंचायत जैसा नजारा ही आज नजर आया।
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1986-87 में भाकियू ने जोर पकड़ा था। किसानों की बिजली, पानी, सिंचाई सहित कई समस्याओं पर बाबा महेंद्र सिंह टिकैत ने शामली-मुजफ्फरनगर जिलों में आंदोलनों की शुरूआत की थी। इसी से प्रभावित होकर बिलारी में किसान नेताओं ने एक महापंचायत की थी । इसमें बाबा टिकैत को बुलाया गया था। इसी महापंचायत में किसान मोर्च का भाकियू में विलय हुआ था। कस्बा निवासी बुुजुुर्ग रामकुंवर सिंह, प्रेमपाल और श्रीनिवास आदि ने बताया कि उस महापंचायत में उमड़े किसानों की संख्या देख बाबा टिकैत ने भी यहां के किसान एकजुटता की सराहना की थी। ठीक उसी का नजारा आज यहां देखने को मिला है। किसानों में वही 1987 वाला जोश नजर आया। जिससे बाबा महेंद्र सिंह टिकैत की उस महापंचायत की याद आ गई। उसी अंदाज में किसान ट्रैक्टरों से नारेबाजी करते हुए गन्ना समिति के मैदान में पहुंच रहे थे।
जर्जर भवन की छत पर भी चढ़ गए उत्साहित किसान
गन्ना समिति के जर्जर हाल भवन के ऊपर भी उत्साहित कार्यकर्ता चढे़ हुए थे। भवन की हालत जर्जर थी इसलिए बार बार मंच से किसानों को नीचे उतरने की अपील की जा रही थी लेकिन जितने किसान उतरते उससे ज्यादा फिर से ऊपर चढ़ रहे थे। इनमें युवा किसानों की संख्या काफी अधिक थी।
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युवा कार्यकर्ताओं ने संभाली व्यवस्था की कमान
महापंचायत में भाकियू के युवा कार्यकर्ताओं में भी जबर्दस्त जोश था। बिलारी और संभल जिले के कई युवा किसान और भाकियू कार्यकर्ताओं ने यहां पर व्यवस्था की कमान संभाली थी। किसानों के ट्रैक्टर और अन्य वाहनों को खाली मैदान में खड़ा करा रहे थे ताकि अव्यवस्था ना फैले। यदि कोई नाराज होता तो हाथ जोड़कर विनम्रता से विनती करते नजर आए। कुछ युवा कार्यकर्ता ट्रैक्टरों से कस्बे में आने वाले मार्गों पर खडे़ थे ताकि किसी को आने जाने में दिक्कत न हो।
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