मुरादाबाद। वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का पंजीकरण पांच दिसंबर तक उम्मीद पोर्टल पर कराया जाना अनिवार्य है लेकिन अब तक जनपद की 80 प्रतिशत संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है। अंतिम तिथि नजदीक आते ही वक्फ संपत्ति के मुतवल्लियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। इन मुतवल्लियों का कहना है कि दशकों पुराने कागजात इकट्ठा करने में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है जिससे वह अबतक संपत्ति का पंजीकरण कराने में नाकाम रहे हैं।
परेशान मुतवल्ली दस्तावेज जुटाने के लिए तहसील और वक्फ बोर्ड समेत अन्य प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। आंकड़ों के अनुसार शहर में पांच हजार वक्फ संपत्तियां हैं जिनका पंजीकरण उम्मीद पोर्टल पर होना है लेकिन अबतक महज 20 प्रतिशत संपत्तियों का ही रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर हो पाया है। जमीयत उलमा के नगर जनरल सेक्रेटरी माैलाना राहत अली का कहना है कि कई संपत्तियों के मुतवल्लियों की वर्षों पहले मृत्यु हो चुकी है जिससे इन संपत्तियों के रिकॉर्ड जुटा पाना लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है।
शरीफ हुसैन के अनुसार पंजीकरण के समय मुतवल्लियों से कई तरह के दस्तावेज मांगे जा रहे हैं जिसमें वक्फनामा, खसरा-खतौनी, नक्शा प्रमुख हैं। कई संपत्तियों के रिकॉर्ड लोकल स्तर पर मौजूद ही नहीं हैं ऐसे में संबंधित लोग लखनऊ स्थित वक्फ बोर्ड कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं लेकिन उन्हें वहां से भी मदद नहीं मिल पा रही है। कई संपत्तियों का वक्फ नंबर भी नहीं मिल पा रहा है जिससे लोग संपत्ति का पंजीकरण अबतक नहीं करा पाए हैं।
- वेबसाइट पर भी आ रही है दिक्कत
उम्मीद पोर्टल की वेबसाइट भी काफी धीमी गति से चल रही है। लोगों को पंजीकरण कराते समय घंटों तक का इंतजार करना पड़ रहा है लेकिन फिर भी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। लॉग-इन करने पर गांव, वार्ड, शहर आदि खोजने में दिक्कत होती है। सुबह के समय वेबसाइट कुछ ठीक चलती है लेकिन दोपहर के बाद वेबसाइट काम करना ही बंद कर देती है और मिनटों का काम घंटों में भी पूरा नहीं हो पाता है।
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इसलिए लोग नहीं करा पा रहे पंजीकरण
- कुछ संपत्तियों के मुतवल्लियों का निधन हो गया है।
- कई मुतवल्लियों को जानकारी का अभाव है।
- वक्फनामा, नक्शा, दफा-37 की रिपोर्ट जैसे दस्तावेज न होने के चलते।
- लोगों के पास वक्फ संपत्ति नंबर नहीं हैं जिससे दस्तावेज भी नहीं मिल पा रहे हैं।
- वेबसाइट धीमी होने के चलते फॉर्म नहीं भर पा रहे।
- पोर्टल पर आ रही तकनीकी दिक्कतों के चलते फॉर्म भरने के बाद भी स्वीकृत नहीं हो रहे।
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क्या बोले मुतवल्ली
- पंजीकरण करते समय पोर्टल पर संपत्ति की सभी दिशाओं से नाप-जोख का लेखा-जोखा मांगा गया है। साथ ही संपत्ति के वक्फ होने के भी दस्तावेज मांगे गए हैं चूंकि संपत्ति सैकड़ों वर्ष पुरानी है इसलिए दस्तावेज जुटाने में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। लखनऊ स्थित वक्फ बोर्ड दफ्तर से भी दस्तावेज हासिल करने में समय लगा है। सभी कागजात जुटाने के बाद संपत्ति का पंजीकरण कराएंगे। - डॉ. आरिफ रजा, मुतवल्ली
- मस्जिद करीब सौ वर्ष पुरानी है जिसकी वजह से कई कागजात मौजूद नहीं हैं। लखनऊ तक की दौड़ लगाई लेकिन कोई मदद नहीं मिली। यह समस्या कई लोगों के साथ है क्योंकि सैकड़ों वर्ष पुरानी संपत्ति का नक्शा या अन्य दस्तावेज जुटाना सभी के लिए मुश्किल है। रजिस्ट्रेशन की समयसीमा बढ़ाई जानी चाहिए ताकि लोग अपनी संपत्ति का पंजीकरण कर सकें। - मो. अब्बास, मुतवल्ली
- कई लोगों को जानकारी ही नहीं है कि किस तरह से संपत्ति का पंजीकरण कराना है। इस संबंध में न तो लोगों को जागरूक किया गया और न ही कोई कैंप लगाकर उन्हें ट्रेनिंग दी गई है। पोर्टल पर पंजीकरण के समय जिन दस्तावेजों को मांग की जा रही है वह अधिकतर के पास मौजूद नहीं है क्योंकि दशकों पहले संपत्ति वक्फ की गई थीं। वक्फ बोर्ड को खुद आगे आकर संपत्तियों के कागजात उपलब्ध कराने चाहिए लेकिन वहां से भी कोई मदद नहीं मिल पा रही है। - लुकमान अंसारी, मुतवल्ली
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जो लोग पूरे कागजात के साथ दफ्तर पहुंच रहे हैं उनके पंजीकरण कराए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि तय समयसीमा में अधिक से अधिक संपत्ति पंजीकृत हो जाए। लोड ज्यादा होने के चलते वेबसाइट की रफ्तार कई बार धीमी हो जाती है जिससे दिक्कत होती है लेकिन फिर भी पंजीकरण हो रहे हैं। - तुलिका शर्मा, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी