मुरादाबाद। रेलवे के रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) ने रेल इंजनों के लिए एक नया डिजाइन तैयार किया है। इसे अत्याधुनिक मेट्रो रेल की तर्ज पर सुविधाओं से लैस किया गया है। खास बात यह है कि इसमें शौचालय भी शामिल हैं। लोको पायलट को इससे बड़ी राहत मिलने वाली है। इसके अलावा नए डिजाइन वाला इंजन साउंड प्रूफ, वातानुकूलित, कवच फिटेड और फॉग सेफ डिवाइस से लैस है।
अब तक ट्रेन के इंजनों में शौचालय न होना लोको पायलट के लिए बड़ी समस्या की वजह बनता है। खासकर महिला लोको पायलट के लिए यह परेशानी कई गुना बड़ी हो जाती है। कुछ माह पहले ही रेलवे ने पुराने इंजनों में शौचालय बनाने का फैसला लिया था। अब आरडीएसओ ने नए इंजनों में इसे शामिल कर बड़ा बदलाव किया है।
लोको पायलट का कहना है कि वर्तमान में डब्ल्यूएजी-5 और डब्ल्यूएजी-7 इंजनों का प्रयोग किया जा रहा है। लोकोपायलट के बैठने के स्थान (कैब) में इंजन की आवाज बहुत आती है। एसी ठीक से काम नहीं करते। क्रू फैन हवा नहीं देते। कवच डिवाइस शामिल नहीं है और सर्दियों में कोहरे के बीच सुरक्षित संचालन के लिए फॉग सेफ डिवाइस अलग से ले जानी पड़ती है।
आरडीएसओ के अधिकारियों का कहना है कि नए इंजनों में इन सब परेशानियों का हल किया गया है। लोको पायलट की सभी सुविधाओं का ध्यान रखते हुए इन्हें आधुनिक और आरामदायक बनाया गया है। बनारस और चितरंजन रेल इंजन कारखानों में नए डिजाइन को भेज दिया गया है। रेलवे बोर्ड की अनुमति मिलने के बाद इन्हें ट्रेनों में फिट किया जाने लगेगा। साथ ही नई ट्रेनें अत्याधुनिक इंजनों के साथ ही चलेंगी।
1000 से ज्यादा महिला लोको पायलट हैं भारतीय रेलवे में
भारतीय रेलवे में 1000 से ज्यादा महिला लोको पायलट हैं। मुरादाबाद मंडल में इनकी संख्या 30 के करीब है। लंबे समय से इनकी मांग थी कि ट्रेनों के इंजनों में शौचालय होने चाहिए। इंजन में शौचालय न होने के कारण लंबी दूरी की ट्रेनों में महिला लोको पायलट को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई घंटे बाद जब ट्रेन किसी स्टेशन पर रुकती है तो इंजन से उतरकर बोगी में जाना पड़ता है। अब इस समस्या से निजात मिलेगी। आरडीएसओ के सूत्रों के मुताबिक नए इंजन के कंट्रोल भी काफी आसान बनाए गए हैं। एडवांस ब्रेक सिस्टम से लेकर विभिन्न प्रकार के अलर्ट के लिए भी स्क्रीन की व्यवस्था की गई है।
वर्जन
लोकोमोटिव में शौचालय की व्यवस्था होना महिला लोको पायलट के लिए बड़ा कदम है। काफी समय से इसकी मांग होती रही है। हालांकि इसके विषय में मंडल स्तर से कुछ ज्यादा नहीं कहा जा सकता। यह रेलवे बोर्ड के स्तर के कार्य हैं।
- विनीता श्रीवास्तव, डीआरएम मुरादाबाद