मुरादाबाद। कच्चे माल की कीमतों में कमी नहीं हो रही है, जिससे लॉकडाउन में भी डटे रहे आर्टिजंस के पांव उखड़ने लगे हैं। चालीस फीसदी तक कीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी से उत्पादों पर मिलने वाला लाभांश कम हो गया है, जिससे निर्यात कारोबारियों को लगातार घाटा हो रहा है, वहीं छोटे कारोबारी बेहाल हो गए हैं।
कोरोना संक्रमण के बढ़ने और यूरोपीय देशों में भी लॉकडाउन लगना शुरू होने से मुरादाबाद के निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि लॉकडाउन और कोरोना महामारी में निर्यात कारोबार पर खास असर नहीं पड़ा, क्योंकि ऑन लाइन सिस्टम के कारण बुकिंग जारी रही। इससे निर्यात कारोबार चालू रहा। इधर पिछले पांच महीनों से कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोत्तरी के कारण निर्यातकों के माथे पर बल ला दिए हैं। याद रहे कि महानगर में पीतल, तांबा, निकिल, एल्युमीनियम, स्टील और लोहा धातुओं से विभिन्न वस्तुएं बनाईं जाती हैं। हस्तशिल्प से हर साल आठ हजार करोड़ तक का कारोबार होता है। लॉकडाउन में भले ही काम प्रभावित हुआ, लेकिन मॉल के स्टॉक और पुराने आर्डर के बूते निर्यात कारोबार चलता रहा, लेकिन कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोत्तरी से जहां महंगाई बढ़ गई है, वहीं आर्डर भी कीमतों के घटने के इंतजार में होल्ड कर दिए गए हैं। कच्चे माल की कीमतों पर अंकुश लगाने की मांग निर्यातक एसोसिएशन के पदाधिकारी शुरू से लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई न होने से यह कीमतें अब उन्हें परेशान करने लगी हैं।
नवंबर और अप्रैल में प्रति किलोग्राम धातुओं के दामों में आया बदलाव
धातु नवंबर फरवरी अप्रैल
पीतल 330 440 480
कॉपर 523 690 710
एल्युमिनियम 150 178 190
निकिल 1210 1500 1510
सीआर शीट 58 72 80
स्टेनलेस स्टील 122 152 160
कच्चे माल की कीमतों और कोरोना ने बढ़ाई चिंता
पहले कच्चे माल की कीमतों और अब कोरोना की बढ़ती संक्रमण से हस्तशिल्प कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। केंद्र सरकार को निर्यात कारोबारियों की हित में सहूलियतें बढ़ानी चाहिए। कच्चे माल की कीमतें कम होनी चाहिए और आर्टिजंस को मिलने वाली योजनाओं का लाभ भी समय से देना चाहिए।
डॉ. राकेश कुमार, महानिदेशक- एक्सपोर्ट्स प्रोमोशन कौंसिल ऑफ हैंडीक्राफ्ट्स (ईपीसीएच)
कोरोना के बढ़ते संक्रमण से बिगउ़ रहे हालात
फ्रांस में लॉकडाउन लगने और जर्मनी व डेनमार्क में लॉकडाउन जैसे हालात से लगने लगा है कि पिछले साल वाली स्थिति उत्पन्न हो सकती है। चूंकि फ्रांस, जर्मनी समेत यूरोप के कई देशों में मुरादाबाद के हैंडीक्राफ्ट उत्पादों के काफी संख्या में ग्राहक हैं। इन देशों से आर्डर भी खूब मिले हैं। ऐसे में इन देशों में लॉकडाउन की आशंका ने सभी निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है।
नवेदउर्ररहमान, अध्यक्ष, मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर एसोसिएशन
इंटरनेशनल फेयर न होने से भी प्रभावित हो रहा कारोबार
निर्यात कारोबार के लिए अंतरराष्ट्रीय मेले काफी महत्व रखते हैं, लेकिन पिछले एक साल से कोरोना संक्रमण के कारण कोई मेला नहीं लग पाया। पहले जनवरी में लगने वाला क्रिस्मस वर्ल्ड निरस्त हुआ, फिर फरवरी में जर्मनी में लगने वाला फ्रैंकफार्ट फेयर और एम्ब्यांते फेयर भी नहीं लग सका। इससे निर्यात कारोबार प्रभावित हो रहा है, क्योंकि पुराने उत्पादों के बूते कब तक आर्डर मिलेंगे।
सत्यपाल, सचिव- द हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन
कच्चे माल के साथ पैकिंग पेपर की कीमतों में बढ़ोत्तरी भी निराशाजनक
यूएसए से लगातार आर्डर मिल रहे हैं, जिससे निर्यात पर कोई फर्क नहीं है, लेकिन कच्चे माल की कीमतों ने हर कारोबारी के सामने दिक्कतें खड़ी की हैं। वहीं अब पैकिंग पेपर की कीमतों में बढ़ोत्तरी के कारण उत्पादों की पैकिंग का काम भी चौपट हो गया है। इससे उत्पादों की पैकिंग तक में दिक्कत आने लगी है। कुल मिलाकर महंगाई के कारण आर्टिजंस के सामने बड़ी परेशानी है।
सुधीर त्यागी, पूर्व चेयरमैन-ईपीसीएच