नोटिस का जवाब भी दिया गया, जिसमें नाले पर कब्जे को लेकर तो कोई बात नहीं कही गई, बल्कि अफसरों को गुमराह करने का प्रयास किया गया। इसके बाद शुक्रवार को सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता नवीन कुमार, उप जिलाधिकारी सदर प्रेमप्रकाश तिवारी तमाम अफसरों के साथ मौके पर पहुंच गए। यहां रिसोर्ट की तरफ जाने वाले सभी मार्गों को पुलिस ने सील कर दिया, जिसके बाद मौके पर किसी को भी नहीं जाने दिया गया।
बुलडोजर से रिसोर्ट के पिछले हिस्से की दीवार तोड़ने का काम शुरू हुआ। करीब एक हजार वर्ग मीटर जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया। ढाई घंटे चली इस कार्रवाई के बाद दीवार का मलबा भी सिंचाई विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया और मलबा जब्त करने के बाद लालपुर बैराज के परिसर में रखवा दिया।
दीवार के मलवे में निकलीं पुरानी ईंटें, डीएम ने बैठाई जांच
रिजॉर्ट जिस दीवार को तोड़कर कब्जा मुक्त कराया गया है, उसमें पुरानी ईंटें निकली हैं। इसके बाद अफसरों ने मौके से कुछ ईंटों को एकत्र कर सील कर दिया। अब इन ईंटों की जांच होगी। अफसरों की मानें तो यह ईंटें किसी पुरानी इमारत को तोड़कर लाई गई हैं। इसी के चलते जिलाधिकारी ने स्टेंडिंग कमेटी को ईंटों की जांच का जिम्मा सौंपा है।
सिंचाई विभाग ने नाला बनाने के लिए जमीन खरीदी थी। जिन किसानों से यह जमीन खरीदी थी, उन्हीं से अब्दुल्ला आजम खां ने जमीन खरीदी थी। उन्होंने रिजॉर्ट की चहारदीवारी में ही नाले को कब्जा लिया। नोटिस का भी सही जवाब नहीं मिला, जिसके बाद नाले को कब्जा मुक्त करा दिया है। अवैध निर्माण को तोड़कर मलवा जब्त कर लिया गया है- नवीन कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग, रामपुर