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रामगंगा में बिना शोधन नालों का पानी गिरने पर अध्यक्ष की फटकार

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मुरादाबाद। रामगंगा नदी के प्रदूषण पर सख्ती के लिए अनुश्रवण समिति के अध्यक्ष अरुण टंडन शनिवार सुबह रामपुर रोड पर बने 58 एमएलडी क्षमता के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पर निरीक्षण के लिए पहुंचे तो पोल खुली कि नालाें का पानी सीधा ही रामगंगा में डाला जा रहा है। उसका कोई ट्रीटमेंट नहीं हो रहा है। सिर्फ एक नाले का 6 एमएलडी गंदा पानी शोधित होने पर उन्होेंने नाराजगी जाहिर की। जलनिगम के अफसरों से पूछा कि पूरे शहर का गंदा पानी सीधे रामगंगा नदी में गिराया जा रहा है। उन्होंने फटकार लगाते हुए स्थिति सुधार की हिदायत दी। जलनिगम के अफसरों ने बीस दिन में 15 से 20 एमएलडी अधिक पानी के शोधन करने की बात कहकर अपना पक्ष रखा।
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एसटीपी में प्रतिदिन औसतन 6 एमएलडी पानी का शोधन किया जा रहा है। सिर्फ कटघर एरिया का पानी ही शोधन के लिए एसटीपी तक पहुंचाया जा रहा है। प्रोजेक्ट भी डेडलाइन से बहुत विलंब हो चुका है। सिर्फ गंदा पानी ही रामगंगा नदी में नहीं फेंका जा रहा है। निरीक्षण में सामने आया कि शोधित होने वाले पानी की इकट्ठा सिल्ट को भी शोधित करने का प्लांट नहीं लगाया गया है। अनुश्रवण समिति के अध्यक्ष और रिटायर्ड जज अरुण टंडन ने पूछा कि शोधन होने के बाद साफ पानी अलग होता है, लेकिन सिल्ट का क्या करते हैं। जलनिगम के अफसरों ने एक टैंक की तरफ इशारा करके बताया कि यहां सिल्ट को जमा किया जाता है। सामने आया कि सिल्ट को शोधन करने की प्रक्रिया नहीं है। अध्यक्ष अरुण ने हिदायत दी कि तत्काल शिल्ट शोधन का प्लांट लगवाया जाए। उन्होंने कहा कि अगर यह शिल्ट कृषि उपयोग में आ सकती है तो कृषि विभाग से भी बात हो सकती है। बशर्ते की शिल्ट में केमिकल नहीं होना चाहिए।
जलनिगम के अफसरों ने अध्यक्ष अरुण टंडन को जानकारी दी कि 20 सितंबर तक कुछ नालों की टैपिंग एसटीपी से होने के बाद प्रतिदिन 20 से 25 एमएलडी गंदे पानी का शोधन शुरू हो सकेगा। इसके बाद साफ पानी ही रामगंगा नदी में छोड़ा जाएगा। एसटीपी का निरीक्षण करने के बाद अध्यक्ष अरुण टंडन और सदस्य अनीता रॉय हापुड़ में निरीक्षण के लिए रवाना हो गए। इस दौरान जलनिगम, जलकल और प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय के अधिकारी साथ में थे।
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