मुरादाबाद। मृतक आश्रित कोटे के तहत अनुकंपा के आधार पर एक युवती ने रेलवे में नौकरी के लिए आवेदन किया। हित निरीक्षकों की जांच व सहायक कार्मिक अधिकारी की आख्या के आधार पर उसे सिग्नल खलासी के पद के लिए चुना गया। युवती रेलवेे स्कूल बरेली में चपरासी या रेलवे अस्पताल में नौकरी करना चाहती थी।
उसकी पात्रता की जांच कर रहे दो हित निरीक्षकों पर युवती ने नौकरी के लिए दो लाख रुपये मांगने और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। रेलवे प्रशासन को दिए शिकायती पत्र में उसने लिखा कि सहायक कार्मिक अधिकारी से बात करने पर उन्होंने भी हित निरीक्षकों का समर्थन किया, कहा कि जैसा वह कहते हैं, वैसा ही करती रहो। इस पर रेलवे की इंटरनल कमेटी ने जांच की।
इसमें रेलवे अस्पताल की सीएमएस डॉ. इंद्रजीत कौर, सीनियर डीपीओ डॉ. अजय सोयल, सीनियर डीओएम (पी) डॉ. अंजू सिंह के अलावा जीके सोती व डॉ. माधुरी सिंह रहीं। कमेटी की जांच में पाया गया कि मनपसंद जगह पर नौकरी न मिलने के लिए युवती ने झूठे आरोप लगाए थे। इस पर हित निरीक्षकों को दोषमुक्त करने के साथ युवती को झूठी शिकायत के लिए उकसाने वालों पर कार्रवाई का आदेश दिया गया।