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कर्मियों ने भरी हुंकार, निकाला मशाल जुलूस

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सिविल लाइन अम्बेडकर पार्क से राज्य कर्मचारी संयुत्त परिषद का मशाल जुलूस निकाली कर्मचारी। अमर उज
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मुरादाबाद। पुरानी पेंशन बहाली समेत 22 सूत्रीय मांगों के समर्थन में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के आह्वान पर गुरुवार को कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। कर्मचारियों ने आंबेडकर पार्क में एकजुट होकर सरकार पर उपेक्षा एवं उत्पीड़न का आरोप लगाया। वक्ताओं ने कहा कि मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो 21 जनवरी 2020 को प्रदेश के मंडल मुख्यालयों पर धरना एवं प्रदर्शन कर आंदोलन किया जाएगा।
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दोपहर में स्वास्थ्य, परिवहन, वन, वाणिज्य कर, कृषि, उद्यान, गन्ना, खाद्य विभाग, नगर निगम, विकास भवन, आरटीओ, विकास प्राधिकरण, लोनिवि और आईटीआई के कर्मचारी नारेबाजी करते हुए आंबेडकर पार्क पहुंचे। कर्मचारियों ने पार्क में बैठक की। अध्यक्ष संदीप बड़ौला ने कहा कि सरकार की नीतियां कर्मचारी विरोधी हैं। कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति सरकार उदासीन है। उच्च स्तरीय समझौता होने के बाद भी उसे लागू नहीं किया जा रहा है। आउट सोर्सिंग कर्मियों से चार साल सेवाएं लेने के बाद निकाला जा रहा है। कर्मचारियों के भत्ते समाप्त किए जा रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि वेतन विसंगति कमेटी की रिपोर्ट कैबिनेट में नहीं लाई जा रही है। वक्ताओं ने कहा कि मांगें पूरी नहीं हुई तो प्रदेश भर के कर्मचारी 21 जनवरी को मंडल मुख्यालयों पर धरना एवं प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
आंबेडकर पार्क में बैठक के बाद कर्मचारियों ने मशाल जुलूस निकाला। जुलूस पार्क से डीएम कार्यालय तक पहुंचा। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मुख्यमंत्री के नाम नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान हेमंत चौधरी, निश्चल भटनागर, मनोज तिवारी, वंदावन दोहरे, अशोक कुमार, लीला सुगड़ा, मंजू वाला, शालिनी भटनागर, जयपाल सिंह, चंद्रशेखर शर्मा, राजवीर सिंह, पूनम सैनी और मो आदिल समेत कई कर्मचारी मौजूद रहे।
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ज्ञापन की मुख्य मांगें
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- नई पेंशन योजना समाप्त कर पुरानी पेंशन को लागू किया जाए
- आउटसोर्सिंग एवं ठेकेदारी प्रथा बंद की जाए
- आउट सोर्सिंग कर्मियों का रिक्त पदों में समायोजन किया जाए
- कर्मियों का समान कार्य का समान वेतन लागू किया जाए
- सातवें वेतनमान का लाभ दिया जाए
- केंद्रीय कर्मियों की भांति भत्ते दिए जाए
- कैश लैस इलाज की सुविधा दी जाए
- कर्मचारियों की जबरन सेवानिवृत्ति बंद की जाए
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