अमर उजाला ब्यूरोमुरादाबाद। नए शैक्षिक सत्र में अब करीब तीन माह का समय शेष रह गया है। लेकिन अभी तक स्कूलों ने फीस जारी नहीं की है। जबकि पिछले महीने जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में इस मुद्दे पर निर्देश भी जारी किए गए थे। अभिभावक संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि स्कूलों में कक्षाओं के स्लैब बदलने से फीस में 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो जाती है। वहीं, स्कूल के पदाधिकारियों का कहना है कि चार जनवरी को होने वाली बैठक में इस मुद्दे पर निर्णय लिया जाएगा।
मुरादाबाद पेरेंट्स आफ ऑल स्कूल के पदाधिकारियों ने डीएम को ज्ञापन देते हुए कहा था कि सत्र 2026-27 के लिए स्कूलों पर फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाई जाए। क्योंकि स्कूलों द्वारा सत्र 2022-23 से 2025-26 तक करीब 50 फीसदी फीस बढ़ोतरी की जा चुकी है। साथ ही विद्यालयों द्वारा फीस के अलग-अलग स्लैब बना रखे हैं। इसकी वजह से जैसे ही छात्र का स्लैब बदलता है, उसकी फीस 25 से 50 फीसदी तक बढ़ जाती है। इस मुद्दे पर चार नवंबर को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में छात्र/छात्राओं से लिए जाने वाले शुल्क के स्लैब को अधिकतम 04 स्लैबों में रखा रखने के निर्देश दिए गए थे। ताकि एक स्लैब से दूसरे स्लैब में परिवर्तन होने पर शुल्क की दर में ज्यादा परिवर्तन न हो। इसके अतिरिक्त प्रत्येक वर्ष शुल्क निर्धारण किए जाने में उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम 2018 में विहित व्यवस्थानुसार बढ़ोत्तरी कम करने को भी कहा था। अभिभावक संघ के पदाधिकारियों ने निजी स्कूलों द्वारा फीस जारी करने की मांग की।
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अभी महंगाई की दर नहीं आई है। उसके बगैर फीस बढ़ोतरी तय नहीं की जा सकेगी। महंगाई दर और पांच फीसदी की फीस मिलाकर बढ़ोतरी की जाती है। यह करीब दस फीसदी बनती है, लेकिन स्कूल 9.5 फीसदी ही फीस बढ़ोतरी करते हैं। स्लैब निर्धारण स्कूलों का अलग-अलग है। इस मुद्दे पर भी बैठक में चर्चा होगी। महंगाई दर जनवरी की शुरुआत में जारी की जाएगी। इसके बाद चार या पांच जनवरी को स्कूलाें की बैठक की जाएगी।
नीरज कुमार गुप्ता, महासचिव, मुरादाबाद एसोसिएशन आफ प्राइवेट स्कूल्स
अभिभावकों की मांग है कि हर वर्ष फीस वृद्धि पर रोक लगे परंतु स्कूलों द्वारा फीस बढ़ा दी जाती है और नियम का हवाला दिया जाता है। देखने की बात यह है कि स्कूल जब फीस बढ़ाता है तो यह भी अधिकारियों को देखना चाहिए का स्कूलों के खर्चे वास्तव में भी बड़े है या केवल दिखाने के लिए डाले जाते हैं। दूसरी बड़ी बात है कि स्कूलों द्वारा कक्षा के हिसाब से फीस के स्लैब बना रखे हैं जैसे ही कोई बच्चा अगले स्लैब में आता है उसकी फीस एक दम से 25-50 फीसदी तक बढ़ जाती है।
अनुज गुप्ता, अध्यक्ष, मुरादाबाद पेरेंट्स आफ ऑल स्कूल