मुरादाबाद। पीतलनगरी के निर्यात कारोबार को कच्चे माल की समस्या से राहत दिलाने के लिए जिले में रॉ-मेटीरियल बैंक स्थापित करने की तैयारी तेज हो गई है। योजना लागू होने पर उद्योगों को कच्चे माल की उपलब्धता आसान होगी। लागत घटेगी और उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी। खास बात यह है कि इस योजना के तहत परियोजना की कुल लागत का 70 से 90 प्रतिशत तक खर्च सरकार वहन करेगी। जबकि निर्यातकों को केवल 10 से 30 प्रतिशत तक निवेश करना होगा।
जिला उद्योग केंद्र के अधिकारियों के मुताबिक यदि जिले का कोई निर्यातक संगठन या समूह रॉ-मेटीरियल बैंक स्थापित करना चाहता है कि तो वह ओडीओपी की सीएफसी (कॉमन फैसिलिटी सेंटर) योजना के तहत प्रस्ताव भेज सकता है। योजना के नियमों के अनुसार चार करोड़ रुपये तक की परियोजना पर 90 प्रतिशत खर्च सरकार उठाएगी और 10 प्रतिशत राशि संबंधित संगठन को देनी होगी। इसी तरह चार करोड़ से आठ करोड़ रुपये तक की परियोजना पर सरकार 80 प्रतिशत हिस्सा देगी, जबकि संबंधित समूह को 20 प्रतिशत निवेश करना होगा। आठ से 10 करोड़ रुपये तक की परियोजना पर 70 प्रतिशत खर्च सरकार वहन करेगी और 30 प्रतिशत राशि निर्यातकों को लगानी होगी। इस योजना का लाभ उठाकर जिले के निर्यातक समूह आसानी से रॉ-मेटीरियल बैंक स्थापित कर सकते हैं।
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एक लाख टन क्षमता के रॉ-मेटीरियल बैंक की जरूरत
जिले में सैकड़ों छोटे-बड़े और मध्यम उद्योग पीतल, एल्युमिनियम, स्टील धातुओं से उत्पाद बनाते हैं। उद्योगों को कच्चे माल की कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव और समय पर आपूर्ति न मिलने की समस्या से जूझना पड़ता है। यस (यंग एंटरप्रेन्योर सोसायटी) के निदेशक उज्ज्वल अग्रवाल का कहना है कि जिले के निर्यातकों को एक लाख टन क्षमता के रॉ-मेटीरियल बैंक की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। इसे लेकर कई बार उद्योग बंधु की बैठकों में भी मांग उठ चुकी है।
भूमि की व्यवस्था करनी होगी संगठन को
जिला लघु उद्योग केंद्र के अनुसार, रॉ-मेटीरियल बैंक खोलने के लिए जमीन की व्यवस्था संबंधित संगठन या निर्यातक समूह को खुद करनी होगी। सरकार केवल परियोजना लागत में वित्तीय सहायता देगी। जमीन उपलब्ध कराना निर्यातक संगठन की जिम्मेदारी होगी।
वर्जन
यदि निर्यातकों का कोई संगठन प्रस्ताव तैयार कर जिला उद्योग केंद्र में जमा करता है तो जिला स्तर पर गठित कमेटी इसकी समीक्षा करेगी। मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव मुख्यालय भेजा जाएगा। बजट स्वीकृत होते ही संबंधित संगठन परियोजना पर काम शुरू कर सकेगा।
- दीपेंद्र कुमार, उपायुक्त, जिला उद्योग केंद्र मुरादाबाद