मुरादाबाद। उपभोक्ता के हितों के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार ने नए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को मंजूरी दे दी है। लेकिन मुरादाबाद में सख्त कानून लागू होने के बाद भी उपभोक्ताओं को न्याय मिल पाना अभी दूर की कौड़ी है। मुरादाबाद में स्थापित दो उपभोक्ता फोरमों में पिछले सात माह से किसी वाद का निपटारा नहीं हुआ। इसकी सीधी वजह पदों का खाली होना है। दोनों फोरम के चारों सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। जबकि दूसरे फोरम के अध्यक्ष पद के रिक्त होने के कारण प्रथम परितोष के अध्यक्ष पर उसका कार्यभार है। कोरम अधूरा होने के कारण सात माह से उपभोक्ताओं को केवल तारीख दी जा रही है।
उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए प्रत्येक जिले में जिला उपभोक्ता संरक्षण विवाद परितोष फोरम का गठन किया गया है। मंडल मुख्यालय के नाते इस जिले में उपभोक्ताओं की संख्या अधिक देखते हुए दो फोरम बनाए गए हैं। प्रत्येक जिला उपभोक्ता फोरम में एक अध्यक्ष व दो सदस्य (एक महिला व एक पुरुष) की नियुक्ति होती है। दिसंबर माह में दोनों फोरमों के चारों सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो जाने के कारण पद रिक्त हो गए हैं। इसके साथ ही जिला उपभोक्ता संरक्षण फोरम द्वितीय के अध्यक्ष का भी कार्यकाल पूरा हो जाने के कारण अध्यक्ष पद रिक्त हो गया।
वाद की सुनवाई के लिए दोनों सदस्यों अथवा एक सदस्य व एक चेयरमैन का होना जरूरी होता है, लिहाजा यहां कोरम पूरा न होने के कारण वादों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। जिला उपभोक्ता संरक्षण विवाद परितोष फोरम प्रथम में 677 तथा द्वितीय में 545 वाद लंबित हैं। जिससे इन पीड़ितों को पिछले सात माह से न्याय नहीं मिल सका है। जिला उपभोक्ता संरक्षण फोरम प्रथम के अध्यक्ष डीके गर्ग को जिला उपभोक्ता संरक्षण फोरम द्वितीय का भी अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। लिहाजा वह दोनों ही फोरमों के पेंडिंग वादों में पिछले सात माह से सिर्फ तारीख पर तारीख ही मजबूरी में लगा रहे हैं।
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प्रदेश में नियुक्त हुए हैं 83 सदस्य, यहां भी जगी उम्मीद
मुरादाबाद। जिला उपभोक्ता संरक्षण विवाद परितोष फोरम प्रथम के रीडर विजय सिंह ने बताया कि प्रदेश में 83 महिला व पुरुष सदस्य पदों पर नियुक्ति हो चुकी है। इन सभी के अभिलेखों का सत्यापन कराया जा रहा है। जल्द ही जिले के दोनों फोरमों में भी रिक्त सदस्यों के पदों पर नियुक्ति की उम्मीद है।
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नये कानून से ये हो गया बदलाव
- जिला उपभोक्ता विवाद परितोष फोरम अब जिला उपभोक्ता विवाद परितोष आयोग हो गया है।
- पहले जिला फोरम में 20 लाख तक के मामले सुने जाते थे अब एक करोड़ तक के मामले सुने जा सकेंगे।
- 20 जुलाई के बाद से नियुक्त सदस्यों का कार्यकाल पांच साल के बजाय चार साल रहेगा।