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बिदेसिया नाटक से बिखरी पूर्वांचल की छटा

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मुरादाबाद के रेलवे स्टेडियम में पूर्वाचल समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में अतिथियों को किया ग? - फोटो : CITY
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मुरादाबाद। रेलवे स्टेडियम में सामाजिक और सांस्कृतिक पूर्वांचलवासी संस्था के तीन दिवसीय वसंतोत्सव के तीसरे दिन मंगलवार को समापन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सुबह में मां सरस्वती की प्रतिमा की स्थापना, पूजन और भंडारा हुआ। शाम को शिक्षकों का सम्मान करने के अलावा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में डूबी रही। बिदेसिया नाटक के मंचन से पूर्वांचल की संस्कृति के दर्शन हुए।
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सुबह में कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती मां की प्रतिमा स्थापना की गई। पंडित आनंद किशोर पांडेय ने मां सरस्वती की प्रतिमा की स्थापना कराई। हवन में श्रद्धालुओं ने विश्व शांति की कामना के साथ आहुतियां दी गईं। भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। परिसर को पीले गेंदा के फूल और पीले पर्दों से सजाया गया था।
शिक्षकों को किया सम्मानित
जिला विद्यालय निरीक्षक प्रदीप कुमार द्विवेदी ने शिक्षकों को सम्मानित किया गया। शिक्षकों को स्मृति चिह्न और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस दौरान प्रवीन कुमार चतुर्वेदी, शिप्रा पांडेय, उर्विंदर कौर, तरुण रस्तोगी, रश्मि ठाकुर, शगुफ्ता जैदी, मधु वर्मा, रफत उस्मान रिजवी, बीना गोस्वामी, देवेंद्र सिंह, डॉ. अनामिका गुप्ता, कामना सारस्वत, सीमा गुप्ता, डॉ. स्वतंत्रता, अवनीश, पूनम मेहरोत्रा, पूनम सक्सेना, शालिनी गुप्ता, फातिमा जमाल, डॉ. नीशु गोस्वामी, सचिन कुमार सिंह, सबा रफी को सम्मानित किया गया। अध्यक्ष विवेक ठाकुर ने बताया कि वसंत उत्सव पर बिहार में सरस्वती पूजा धूमधाम से की जाती है। वसंत शिक्षक सम्मान किया है, क्योंकि यह शिक्षक स्वयं विद्यार्थियों को ज्ञानवान बना रहे हैं। कार्यक्रम में बिहार से आए कलाकारों को सम्मानित किया गया। बनारस, पटना से आए स्टॉल संचालकों को भी सम्मानित किया गया।
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पौने दो घंटे तक लाइव मंचन का उठाया लुत्फ
मुख्य अतिथि जिला पूर्ति अधिकारी संजीव कुमार सिंह रहे। रंगारंग कार्यक्रम की प्रस्तुतियों में भोजपुरी नृत्य झूमर, झिझिया, जट-जटिनी नृत्य की प्रस्तुति दी गई। भिखारी ठाकुर के बिदेसिया नाटक का मंचन किया गया, जिसमें पूर्वांचल की पूरी संस्कृति की झलक देखने को मिली। सभी पारंपरिक संगीत जैसे होली, चैता, झूमर आदि की प्रस्तुति इस नाटक में समाहित थी। संजय उपाध्याय के निर्देशन में करीब 35 कलाकारों ने इस नाटक का सजीव मंचन किया गया। नाटक में दिखाया कि एक व्यक्ति परदेश जाकर दूसरी महिला से विवाह कर लेता है। ऐसे में पहली पत्नी के जीवन में किस-किस तरह की कठिनाईयां और चुनौतियों का दौर आता है, यह देखने को मिला। इन कलाकारों की यह 726वीं प्रस्तुति रही। पौने दो घंटे के इस नाटक का दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया। प्रदीक्षणा ने सुरीली आवाज में सरस्वती वंदना, दीपिका चौधरी ने ओम नम: शिवाय गीत सुनाए तो श्रोताओं ने तालियां बजाकर उत्साहवर्धन किया।
यह रहे मौजूद
एसएन सिंह, घनश्याम सिंह, राजेश चौबे, क्रांति चौबे, अभिषेक चौबे, मुनेंद्र गिरी, परिमल श्रीवास्तव, भूपेश सिंह, अंकित सिंह, उमेश भारती, विशाल सिंह, डीबी सिंह, निशांत शुक्ला, दिनेश सिंह, शालिनी चौबे, सोनी दुबे आदि मौजूद रहे।
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