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दीपावली से पहले मुरादाबाद के प्रदूषण ने तोड़ा रिकॉर्ड

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लालबाग में भट्ठियों से निकलता धुआं। - फोटो : CITY
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मुरादाबाद। दीपावली का त्योहार आने में अभी नौ दिनों का समय शेष है, लेकिन मुरादाबाद के वायु प्रदूषण ने त्योहार से पहले अब तक का सबसे अधिक वायु गुणवत्ता सूचकांक होने का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। गुरुवार सुबह मुरादाबाद का एक्यूआई 490 दर्ज किया गया। यह देश में दूसरे स्थान पर था। हैरत की बात यह है कि प्रदूषण के स्तर में हुई इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी का ठीकरा अधिकारियों ने मौसम के बदलाव और एयर क्वालिटी मॉनीटर पर पर फोड़ दिया। अधिकारियों का कहना है कि तापमान में गिरावट होने से प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी हुई है और यह मॉनीटर ऐसे स्थान पर लगा है जहां ज्यादा प्रदूषण रहता है।
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पिछले कई दिनों से वातावरण में छाई धुंध मुरादाबाद शहरवासियों के लिए परेशानी का सबब बन रही है। गुरुवार सुबह के समय भी धुंध की परत छाई हुई थी। प्रदूषण की गंभीर स्थिति की वजह से सुबह के समय सड़कों पर टहलने वाले नागरिकों की संख्या अन्य दिनों की अपेक्षा कम रही। हालात यह हैं कि दिन में समय बढ़ने के बावजूद अब धूप की तपिश भी कम हो गई है। गुरुवार सुबह दस बजे मुरादाबाद का एक्यूआई 490 था। इसमें पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर पांच सौ, न्यूनतम 440 और औसत 490 था। पीएम 10 का स्तर अधिकतम पांच सौ, न्यूनतम 412 और औसत 477 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति गंभीर है। इससे स्वस्थ व्यक्ति के बीमार होने की भी आशंका रहती है।
2017 में दीपावली के बाद था अधिकतम स्तर
मुरादाबाद में अब तक का सबसे अधिक वायु प्रदूषण पांच सौ एक्यूआई सात नवंबर 2017 को दर्ज किया गया था। इसके बाद 13 नवंबर को 494 वायु गुणवत्ता सूचकांक था। हालांकि यह प्रदूषण दीपावली के बाद दर्ज किया गया था, क्योंकि वर्ष 2017 में दीपावली 19 अक्तूबर की थी, लेकिन दीपावली से पहले गुरुवार को अब तक का सबसे अधिक प्रदूषित दिन था।
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अवैध पीतल भट्ठियां दे रहीं गंभीर बीमारियां
शहर के लालबाग, नवाबपुरा, बंगला गांव, पीतल नगरी आदि क्षेत्रों में पीतल गलाने के अलावा कबाड़े से धातु बीनने का कार्य किया जाता है। इसके कारण यहां पर सांस, हृदय, आंख और त्वचा संबंधी रोगों से परेशान मरीजों की अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा संख्या ज्यादा है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषित हवा से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, कैंसर, रक्तचाप, माइग्रेन, त्वचा बीमारी, आंखों में जलने की समस्या होती है।
रक्त, नाखून और बालों में मिले हैं भारी कण
हिंदू कालेज स्थित नेशनल एयर मॉनीटरिंग प्रोग्राम की समन्वयक डॉ. अनामिका त्रिपाठी ने बताया कि पिछले वर्ष एनआईओएच (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अक्यूपेशनल हेल्थ) की ओर से इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च टीम मुरादाबाद आई थी। उनकी जांच में लोगों के रक्त में भारी धातु मर्करी, कैडमियम, आर्सेनिक, लेड, क्रोमियम, कापर, जिंक के कण आदि मिले थे। मानक है कि यह धातुएं रक्त में होनी ही नहीं चाहिए, जबकि वहां पर सात से आठ गुना मिली थीं। इसके बाद उन व्यक्तियों के नाखून और बालों का परीक्षण हुआ। उसमें भी यह धातुएं मिली थीं।
लो जी! क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी विकास मिश्र बोले, ये मौसम का जादू है.......
प्रश्न : मुरादाबाद का प्रदूषण ज्यादातर समय देश में टॉप थ्री पर रहता है क्यों?
उत्तर : यह मौसम का असर है। मुरादाबाद के अलावा आसपास के जनपदों का वायु गुणवत्ता सूचकांक भी 450 के आसपास चल रहा है। पराली का असर हो सकता है।
प्रश्न : कहां जल रही है पराली, आपको पता है?
उत्तर : पराली जलने की निगरानी हम नहीं करेंगे। इसकी जिम्मेदारी कृषि विभाग की है। उसके लिए समिति बनी है। कृषि विभाग के अधिकारी या जिलाधिकारी ही कोई जानकारी दे सकते हैं।
प्रश्न: प्रदूषण नियंत्रण के लिए किस विभाग को जिम्मेदारी दी है।
उत्तर : जिलाधिकारी ने दस अक्तूबर को नगरायुक्त नगर निगम, अधीक्षण अभियंता विद्युत नगरीय, उपायुक्त उद्योग को सभी कोयले आधारित होटल-रेस्टोरेंट को गैस में परिवर्तित कराने, गैसीय उत्सर्जन करने वाले उद्योगों को तत्काल प्रभाव से बंद करवाने, 24 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने और सड़कों की धुलाई करवाने के निर्देश दिए थे। क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि नगर निगम द्वारा सड़कों की धुलाई शुरू करवा दी गई है, जबकि अन्य दोनों विभागों ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
प्रश्न : जिन विभागों ने कार्रवाई नहीं की तो शासन को क्या रिपोर्ट भेजी है?
उत्तर : इस संबंध में जिलाधिकारी ही पूरी जानकारी दे सकते हैं।
प्रश्न : दीपावली पर प्रदूषण नियंत्रित करने को क्या कदम उठा रहे हैं?
उत्तर : नगर निगम द्वारा जल छिड़काव बढ़वा दिया जाएगा।
डीएम बोले, मशीन समेत चार कारणों से बढ़ रहा है प्रदूषण
जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह ने मुरादाबाद बढ़ने के चार कारण बताए हैं। उनका कहना है कि प्रदूषण इतना बढ़ नहीं रहा है जितनी यहां का एयर क्वालिटी मानीटर बता रहा है। जिलाधिकारी के मुताबिक ये चार कारण हैं जो इस स्थिति के कारक हैं।
1. डीजल चलित वाहन। यहां डीजल चलित वाहन काफी हैं। 20-25 हजार वाहन सड़क पर होते हैं जिससे प्रदूषण बढ़ रहा है। लॉकडाउन में ये नहीं चल रहे थे तो लेवल सही था।
2. मुरादाबाद का जनसंख्या घनत्व। यहां तीन वर्ग किमी में एक लाख लोग निवास करते हैं। इसलिए पोल्यूशन लेवल ज्यादा रहता है
3. पीतल उद्योग। पीतल इंडस्ट्री होने के कारण यहां प्रदूषण ज्यादा है। हालांकि कोयले से चलने वाले उद्योगों को बदला जा रहा है। ज्यादा गैस उत्सर्जन करने वाली इकाइयों पर भी अंकुश लगाया जा रहा है।
4. एयर क्वालिटी मॉनीटर। यह गलत स्थान पर लगाया है। यह लाजपत नगर में ऐसी जगह लगा है जहां रेलवे का गोदाम है। वहां सारा दिन माल उतरता है। धूल उड़ती है। ऐसे में यहां प्रदूषण हमेशा ज्यादा शो करता है। यह मशीन कतई भी पूरे मुरादाबाद का समुचित प्रतिनिधित्व नहीं करती है। इसके लिए हमने स्मार्ट सिटी में चार स्थानों पर मॉनीटर लगवाने के लिए उप्र नियंत्रण बोर्ड को लिखा है। इस मशीन को भी ऐसी जगह लगवाने को कहा है जहां शहर सही मॉनीटरिंग हो सके।
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