मुरादाबाद। इंजीनियर इकराम के अपहरण और हत्याकांड के मास्टरमाइंड शकील का चौथा साथी राजेंद्र भी उसी पुलिस वैन में सवार था, जिसमें बुधवार को यह सनसनीखेज वारदात हुई। लेकिन राजेंद्र ने अपने बाकी तीन साथियों के साथ भागने से इंकार कर दिया। जेल अफसरों की मानें तो पिछले कुछ समय से शकील और राजेंद्र के बीच अनबन भी थी। पुलिस अफसरों ने राजेंद्र से भी बुधवार रात लंबी पूछताछ की थी। गुरुवार को भी उससे जेल में पुलिस टीम ने सवाल - जवाब किए। इस बीच आईजी ने फरार बंदियों की तलाश के लिए 10 टीमें गठित कर दी हैं।
आईजी रमित शर्मा ने बताया कि संभल पुलिस की सात टीमें फरार बंदियों की तलाश के लिए लगाई गई हैं। इसके अलावा शकील गैंग को 2014 में गिरफ्तार करने वाले तत्कालीन कुंदरकी थानाध्यक्ष ध्रुव कुमार को रामपुर से संभल भेजा गया है। अमरोहा में प्रवीण सोलंकी के नेतृत्व में एक टीम गठित करके संभल भेजी गई है। मुरादाबाद क्राइम ब्रांच की टीम को भी इसमें लगाकर संभल कैंप कराया जा रहा है। आईजी नेे बताया कि जिस वक्त तीनों बंदी शकील, कमल बहादुर और धर्मपाल दो सिपाहियों की हत्या कर भाग रहे थे उस समय इनका चौथा साथी राजेंद्र भी उसी पुलिस वैन में सवार था। राजेंद्र को कुंदरकी पुलिस ने 16 अक्तूबर 2014 को कुंदरकी के इंजीनियर इकराम के अपहरण व हत्याकांड में धर्मपाल के साथ गिरफ्तार किया था। इन दोनों की निशानदेही पर ही अगवा इंजीनियर इकराम का शव बदायूं जिले के जरीफ नगर थाना क्षेत्र में उदहोटी गांव के जंगल से एक बोरिंग की कुंइयां से बरामद हुआ था। इसी हत्याकांड में 22 अक्तूबर 2014 को पुलिस ने कमल और शकील को गिरफ्तार कर फिरौती के 11.30 लाख रुपये बरामद किए थे। 20 जुलाई को अदालत इकराम हत्याकांड में फैसला सुनाएगी। सजा होने के डर से ही बंदी कस्टडी से भागे हैं। पुलिस इस बात की भी छानबीन कर रही है कि शकील गैंग का चौथा साथी राजेंद्र जो घटना में आसानी से साथियों के साथ भाग सकता था, वह क्यों नहीं भागा। पुलिस उससे पूछताछ कर उसके साथियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
फरार बंदियों पर ढाई - ढाई लाख रुपये का ईनाम घोषित किया गया है। पुलिस ही नहीं पब्लिक का भी कोई व्यक्ति यदि बंदियों के बारे में कोई सूचना देगा या फिर उन्हें पकड़ेगा तो उसे पुरस्कार की राशि दी जाएगी। फरार बंदियों की गिरफ्तारी के लिए 10 टीमों का गठन किया गया है। इसके अलावा आईजी एसटीएफ भी अपनी टीमों के साथ संभल में कैंप कर रहे हैं। घटना में बंदियों ने 315 बोर और 32 बोर के हथियार का इस्तेमाल किया था। हथियार बंदियों तक कैसे पहुंचे इसकी जांच की जा रही है। किसी महिला द्वारा एक थैला सेशन हवालात पर बंदी को देने की सूचना के बाद शकील की दादी से भी पूछताछ की जा रही है। घटना में इस्तेमाल 32 बोर का हथियार मुंगेर का तमंचा भी हो सकता है। वैन में शकील गैंग का चौथा साथी और इंजीनियर हत्याकांड का आरोपी राजेंद्र भी मौजूद था। लेकिन वह उसके साथ नहीं भागा। - रतिम शर्मा, आईजी।