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तीन तलाक के मामलों में सच ढूंढना पुलिस के लिए चुनौती

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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तीन तलाक का कानून बनने के बाद तीन तलाक के मामलों से जुड़ी शिकायतों में जबरदस्त तेजी आ रही है। पुलिस भी इसे देखकर हैरान है। अब मुस्लिम दंपती के बीच विवाद के ज्यादातर मामलों में तीन तलाक दिए जाने का आरोप लग रहा है।

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इन मामलों में कौन सा मामला सच्चा है और कौन सा मामला झूठा है, यह पता लगाना पुलिस के लिए चुनौती बन रहा है। जिसके लिए पुलिस को माथापच्ची करनी पड़ रही है। जनपद में कानून बनने के बाद तीन तलाक के 18 मामले अलग अलग थानाें में दर्ज किए जा चुके हैं।

परिवार परामर्श केंद्र की प्रभारी संध्या रावत ने बताया कि जो मामले तलाक से जुडे़ हुए आ रहे हैं। उनमें जब काउंसलिंग के लिए दंपती को बुलाया जाता है तो पति दावा करता है कि उस पर लगाया जा रहा आरोप मनगढ़ंत है जबकि महिला का कहना होता है कि पति ने उसे तीन तलाक दे दिया है।
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साक्ष्य के तौर पर कई बार महिला अपने ही मायके पक्ष के लोगों को बतौर गवाह लेकर आती है। लेकिन कई बार तो गवाह भी नहीं होते हैं। इस स्थिति में सच और झूठ का पता लगाना पुलिस के लिए चुनौती है।

तीन तलाक का सबूत देने के लिए महिला लाएगी फतवा
रविवार को भी इस तरह का ही एक मामला सामने आया है, जिसमें पत्नी ने पति पर तीन तलाक देने का आरोप लगाया है तो पति ने उससे इंकार किया है। पति के खिलाफ महिला के पास साक्ष्य नहीं है। ऐसी स्थिति में महिला ने कहा कि वह इस संबंध में फतवा लाकर पुलिस को सौंपेगी।
तीन तलाक के हालिया मामले
. अक्तूबर में मुगलपुरा में रहने वाली महिला को उसके पति ने दिया तलाक
. 23 अक्तूबर को भोजपुर में सिपाही ने फोन पर पत्नी को दिया तीन तलाक
. 14 नवंबर को गलशहीद में रहने वाली महिला को उसके पति ने दिया तलाक
. कटघर निवासी एक महिला को उसके पति ने जिला अस्पताल के बाहर दिया तलाक

कानून के डर से समझौते
कानून के डर से तीन तलाक के मामलों में समझौते भी हो रहे हैं। मामला संज्ञेय अपराध का होने के कारण आरोपियों को रिपोर्ट दर्ज होने पर जेल जाने का डर लगा रहता है, ऐसे में कई मामलों में आरोपियों ने समझौते भी कर लिए हैं। पति द्वारा समझौता किए जाने के बाद पत्नी एफआईआर दर्ज नहीं करवाती है।
झूठे मामलों का पता लगाने के लिए काउंसलिंग: एसपी
मुरादाबाद। एसपी सिटी अमित आनंद ने बताया कि तीन तलाक के कई मामले ऐसे होते हैं, जिनमें साक्ष्य उपलब्ध रहते हैं। जैसे की भीड़भाड़ वाले स्थान पर या मोबाइल के जरिए एसएमएस कर तीन तलाक देने पर साक्ष्य मिल जाते हैं और इन केसों में तुरंत रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाती है लेकिन जिन मामलों में साक्ष्य नहीं होता है, उसमें काउंसलिंग कर सच्चाई का पता लगाने का प्रयास किया जाता है। परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर इन मामलों में कार्रवाई की जाती है। जांच सात दिन के अंदर पुलिस को पूरी करनी होती है।

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