मुरादाबाद। दुनिया भर में अपने पहले गीत संग्रह और काव्य कृति ‘चंदन वन डूब गया’ से काव्य प्रेमियों के मन में जगह बनाने वाले किशन सरोज के सफर में जिगर का शहर मुरादाबाद एक खास पड़ाव रहा। उनकी इस पहली पुस्तक का प्रकाशन मुरादाबाद से ही हुआ। इसके बाद यहा जिगर मंच और कलक्ट्रेट के कवि सम्मेलनों में उनका आना-जाना रहा। उनके निधन की खबर से मुरादाबाद का साहित्य जगत भी शोकाकुल था।
उनके गीत संग्रह ‘चंदन वन डूब गया’ का प्रकाशन 1986 में मुरादाबाद की संस्था सवेरा ने किया था। यहीं उसका प्रकाशन हुआ। नवगीतकार माहेश्वर तिवारी ने उसकी पांडुलिपि को पढ़ा और उसकी भूमिका लिखी। माहेश्वर तिवारी ने बताया कि किशन सरोज उन्हें हमेशा बड़े भाई की तरह मानते थे। उनके जाने से बिंबात्मक गीत का एक अध्याय समाप्त हो गया। साहित्यिक संस्था ‘अक्षरा’ की ओर से मशहूर हास्य कवि डॉ. मक्खन मुरादाबादी के नवीन नगर स्थित आवास पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शहर के कवियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके काव्य मंचों के साथी रहे डा. मक्खन मुरादाबादी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। नवगीतकार योगेंद्र वर्मा ‘व्योम’, डॉ. मनोज रस्तोगी, अशोक विश्नोई, राजीव ‘प्रखर’, डा. प्रेमवती उपाध्याय, मनोज ‘मनु’, राहुल शर्मा, प्रत्यक्ष त्यागी आदि मौजूद रहे।