कर्ज माफी पर अब कोई बहाना नहीं चल सकेगा। चुनाव से पहले किया गया अपना वादा प्रधानमंत्री निभाएं। किसानों के कर्ज माफ करें और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू कराएं। नहीं तो 2019 में मोदी को सत्ता से बाहर जाना होगा। ये दावा किया भारतीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीएम सिंह ने। वह संभल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
रविवार को निरीक्षण भवन में किसानों से सीधा संवाद करने के बाद पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि दिल्ली में 29-30 नवंबर को 200 से अधिक किसान संगठनों ने आंदोलन किया था, जिसमें राहुल गांधी भी आए थे। सभी ने किसानों की कर्जमाफी और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की मांग को जायज करार दिया है। चुनाव से पहले भाजपा ने भी इन मांगों को उचित बताया था। लेकिन पीएम मोदी यह कहते रहे हैं कि राज्यसभा में बहुमत न होने की वजह से बिल अटक जाते हैं। अब तो विपक्षी पार्टियां भी साथ खड़ी हैं। अगर प्रधानमंत्री चाहते हैं कि किसान का हित हो तो वह संसद में पेश किसान हित के प्राइवेट मेंबर बिलों को पारित कराएं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसानों के मुद्दों पर संघर्ष कर रहे हैं। अगर पीएम अपना वादा पूरा करते हैं तो ठीक है, अन्यथा में किसान तय करेंगे कि क्या करना है? उन्होंने कहा कि राहुल गांधी से भी उनका कोई लेना देना नहीं है, किसानों के लिए अगर राहुल भी कुछ नहीं करते हैं तो किसान उन पर भी अपना निर्णय लेंगे।
गन्ने पर ब्याज के 2000 करोड़ रुपये चाहिए
किसान नेता बीएम सिंह ने बताया कि सपा सरकार के कार्यकाल में चीनी मिलों के लिए दरियादिली दिखाई गई थी। अखिलेश यादव की सरकार ने उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के हित पर चोट करते हुए 2,000 करोड़ रुपये ब्याज के माफ किए थे। इसके खिलाफ उन्होंने कोर्ट में लड़ाई लड़ी है। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। सुनवाई के लिए 20 दिसंबर लगी है। बताते चलें कि बीते सत्रों में 14 दिन की अवधि में भुगतान न करने पर यूपी की चीनी मिलों पर 2,000 करोड़ रुपये की देनदारी बनी थी। यह धनराशि मिलों ने नहीं दी थी।