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Moradabad News: लोग कहते थे लड़की है, बॉक्सर नहीं बन पाएगी... एशियाई खेल में पदक ले लाई प्रिया

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मम्मी-पापा का सपना पूरा करने के लिए बॉक्सिंग रिंग में रात भर जागती थी
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- बचपन में बॉक्सिंग सीखने की जिद की, पिता ने बिना हिचक थमाए थे ग्लव्स
एशियन गेम्स में कांस्य जीतकर बढ़ाया देश का मान

शिवम वर्मा
मुरादाबाद। कभी लोगों ने कहा था कि लड़की है, बॉक्सिंग जैसे खेल में क्या कर पाएगी। पंच पड़ेंगे तो चेहरा खराब हो जाएगा। कोई शादी भी नहीं करेगा। लेकिन इन बातों पर घर वालों ने कोई ध्यान नहीं दिया और बेटी के सपने पर भरोसा किया। हर चुनौती के बीच रिंग में उतरती रहीं प्रिया घंघास। अब वही प्रिया एशियन गेम्स में भारत के लिए कांस्य पदक जीतकर लौटी हैं। मुरादाबाद मंडल में सीसीटीसी के पद पर कार्यरत प्रिया ने महिला 60 किलोग्राम भार वर्ग में सेमीफाइनल तक पहुंचकर देश के लिए पदक पक्का किया।


परिवार के लिए यह सिर्फ पदक नहीं, उन तमाम सवालों का जवाब भी है जो कभी उनकी बेटी के सपने पर उठे थे। प्रिया के पिता महेंद्र घंघास बताते हैं कि बेटी इस सपने को पूरा करने के लिए बॉक्सिंग रिंग में रात-रात भर जागी है। उसने खेतों में दौड़ और बॉक्सिंग का कड़ा अभ्यास किया है। प्रिया को बचपन से ही खेलों का शौक था। वर्ष 2015 में उन्होंने बॉक्सिंग सीखने की इच्छा जताई तो परिवार ने उसे रोकने के बजाय पूरा साथ दिया। शुरुआत में आसपास के लोगों के ताने भी सुनने को मिले। लेकिन प्रिया ने अपनी मेहनत से जवाब देने का रास्ता चुना। अभ्यास, फिटनेस और खानपान में अनुशासन को जिंदगी का हिस्सा बना लिया। यही वजह है कि पिछले करीब ढाई साल से उन्होंने मिठाई तक को हाथ नहीं लगाया।
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एशियन गेम्स में प्रिया ने क्वार्टर फाइनल में तजाकिस्तान की मिजगोना समादोवा को 5-0 से हराया। इस जीत के साथ उन्होंने सेमीफाइनल में जगह बनाई और भारत का पदक पक्का कर दिया। अंतिम चार के मुकाबले में उनका सामना चीन की पूर्व विश्व चैंपियन यांग चेंग्यू से हुआ। कड़े मुकाबले में प्रिया 1-4 से हार गईं, लेकिन कांस्य पदक उनके नाम हो गया।
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वजन बरकरार रखने के लिए ढाई साल नहीं खाई मिठाई

प्रिया घंघास ने मुक्केबाजी में अपनी फिटनेस और वजन बनाए रखने के लिए पिछले करीब ढाई साल से मिठाई को हाथ तक नहीं लगाया। पिता महेंद्र घंघास के मुताबिक, बेटी ने अपने खानपान पर बेहद सख्ती कर रखी है। वजन वर्ग में बने रहने के लिए वह मीठे से पूरी तरह दूरी रखती हैं। त्योहार हो या घर में कोई खुशी का मौका, सामने मिठाई होने के बावजूद प्रिया ने अपनी डाइट से समझौता नहीं किया। पिता कहते हैं कि बेटी की इस मेहनत और अनुशासन का नतीजा अब अंतरराष्ट्रीय पदकों के रूप में सामने आ रहा है। राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण के बाद एशियन गेम्स का कांस्य भी उसी त्याग और मेहनत की मिसाल है। प्रिया की तैनाती मुरादाबाद रेलवे में करीब 10 माह पहले हुई थी। नियुक्ति के बाद से वह लगातार खेलों के लिए अभ्यास कर रही हैं।
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