पाकबड़ा। श्री रामलीला कमेटी की दशकों पुरानी जमीन की पैमाइश करने पर राजस्व विभाग और रामलीला कमेटी के बीच विवाद खड़ा हो गया है। तहसीलदार सदर विरेश कुमार सिंह ने जमीन की पैमाइश के बाद रामलीला कमेटी के दावे वाली जमीन का एक हिस्सा ग्राम समाज का बताते हुए उसे नगर पंचायत को सौंप दिया। इस कार्रवाई से कमेटी के सदस्यों और हिंदू समाज में आक्रोश है।
तहसीलदार सदर विरेश कुमार सिंह और नगर पंचायत के ईओ विजय आनंद शुक्रवार को राजस्व विभाग की टीम के रामलीला मैदान पहुंचे। इस दौरान कर्मचारियों ने रामलीला मैदान की पैमाइश शुरू कर दी। टीम ने दस्तावेजों के आधार पर जमीन की पैमाइश की। इसके बाद टीम ने दावा किया कि मैदान के नाम पर दर्ज कुल भूमि में से 3850 वर्गमीटर भूमि सरकारी अभिलेखों के अनुसार ग्राम समाज की है। पैमाइश पूरी होने के बाद राजस्व कर्मचारियों ने सीमांकन की कार्रवाई की।
राजस्व विभाग की टीम ने ग्राम समाज और रामलीला कमेटी के अधीन माने जाने वाले हिस्सों को अलग-अलग बताते हुए मौके पर ही रस्सी से निशान लगाया। तहसीलदार सदर ने जमीन का वह चिह्नित हिस्सा, जिसे ग्राम समाज का बताया गया है। उस जमीन को नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी के हवाले करने के निर्देश दिए।
श्री रामलीला कमेटी पाकबड़ा के सचिव नरेश सक्सेना ने बताया कि राजस्व विभाग की टीम के आने या जमीन की पैमाइश किए जाने की कोई पूर्व सूचना कमेटी को नहीं दी गई थी। मौके पर पहुंचने से पहले ही नाप-तौल की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी थी। यह नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने दावा किया कि यह जमीन करीब 70 साल से श्री रामलीला कमेटी पाकबड़ा के अधीन है। दशकों से यहां पर प्रतिवर्ष रावण दहन का भव्य कार्यक्रम होता आया है। यह जमीन पूरी तरह से हिंदू समाज के धार्मिक और सामाजिक इस्तेमाल में आती रही है।
रामलीला मैदान की पैमाइश तहसीलदार सदर के माध्यम से कराई गई है। नगर पंचायत के कर्मचारी मौके पर मौजूद थे।