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Moradabad News: ट्रेड यूनियनों के अस्तित्व पर संकट, 51 प्रतिशत वोट जरूरी

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मुरादाबाद। नए श्रम कानून लागू होने के बाद मौजूदा दौर में मान्यता प्राप्त यूनियनों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। नए ट्रेड यूनियन कोड के मुताबिक चुनाव में कुल मतदाताओं की संख्या का 51 प्रतिशत वोट पाना जरूरी होगा। इसके बाद ही ट्रेड यूनियन की मान्यता मिलेगी। हर तीन साल पर चुनाव कराया जा सकेगा।
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इसे लेकर एआईआरएफ संबद्ध नॉर्दर्न रेलवे मेंस यूनियन और एनएफआईआर संबद्ध उरमू ने विरोध शुरू कर दिया है। ट्रेड यूनियनों के शीर्ष नेतृत्व ने इसे यूनियन को खत्म करने की साजिश बताया है। 1961 से लागू ट्रेड यूनियन एक्ट के मुताबिक कुल मतदाताओं का 35 प्रतिशत वोट पाने वाली यूनियन को मान्यता मिलती थी। डाले गए मतों की कुल संख्या का 30 प्रतिशत पाने पर भी मान्यता का नियम था। यदि किसी यूनियन को कम वोटिंग के कारण 30 प्रतिशत वोट भी नहीं मिले तो 20 प्रतिशत वोट पाने वाले को रेलवे बोर्ड व भारत सरकार मान्यता देती थी। इस नियम के मुताबिक रेलवे में मान्यता के तीन चुनाव संपन्न हो चुके हैं। पिछले वर्ष का चुनाव भी इसी नियम के अनुसार हुआ। अब 51 प्रतिशत वोट पाना किसी यूनियन के लिए बहुत मुश्किल होगा। यदि किसी को 51 प्रतिशत वोट मिलते हैं तो भी रेलवे में एकमात्र ट्रेड यूनियन रह जाएगी। नए श्रम कानूनों में ट्रेड यूनियनों के लिए बनाए गए नए नियम रेलवे कर्मचारियों व यूनियन प्रतिनिधियों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।
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पीएनएन व स्ट्राइक का अधिकारी होगा खत्म, स्टाफ काउंसिल का होगा गठन
मुरादाबाद। उरमू के महामंत्री बीसी शर्मा के मुताबिक नए ट्रेड यूनियन कोड में कहा गया है कि यदि कोई यूनियन 51 प्रतिशत मत हासिल नहीं कर पाती है तो 20 प्रतिशत या उससे अधिक वोट पाने वाले संगठन के प्रतिनिधियों को स्टाफ काउंसिल का सदस्य बनाया जाएगा। यह स्टाफ काउंसिल रेल प्रशासन के साथ बैठक कर कर्मचारियों के मुद्दे रख सकेगी। 51 प्रतिशत वोट न पाने की स्थिति में किसी को स्थायी वार्ता तंत्र में शामिल होने या कर्मचारी हितों के नाम पर विरोध प्रदर्शन या हड़ताल का अधिकार नहीं होगा। ब्यूरो
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पिछले चुनाव में नरमू को मिले थे 39.45 प्रतिशत वोट
मुरादाबाद। 2024 में 11 साल बाद हुए मान्यता के चुनाव में उत्तर रेलवे में नरमू को लगभग 39.45 प्रतिशत वोट मिला, जबकि उरमू को 33.11 फीसदी वोट से संतोष करना पड़ा। मुरादाबाद मंडल में नरमू को 49.84 प्रतिशत वोट मिले थे। जबकि उत्तरीय रेलवे मजदूर यूनियन 26 फीसदी वोट ही पा सकी। 2013 में हुए चुनाव में उरमू का वोट प्रतिशत अधिक था। 2024 केे चुनाव में 16481 में से 14160 कर्मचारियों ने वोट डाला था। कुल पांच यूनियन मैदान में उतरी थीं। नरमू को 6939 वोट मिले, जबकि उरमू के खाते में 3738 वोट आए। मुरादाबाद मंडल में वोट प्रतिशत 85.92 रहा था। जबकि उत्तर रेलवे के लखनऊ, मुरादाबाद, फिरोजपुर, अंबाला व दिल्ली मंडल में कुल वोट प्रतिशत 85.17 रहा। ब्यूरो

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लोकसभा चुनाव में सांसद पद के प्रत्याशी के लिए 51 प्रतिशत वोट पाना लगभग नामुमकिन होता है। चूंकि वोटिंग प्रतिशत ही 70 प्रतिशत से अधिक बमुश्किल जाता है। ऐसे में ट्रेड यूनियन के लिए सरकार अलग नियम क्यों बना रही है। यह कर्मचारियों के लिए ठीक नहीं है।
- बीसी शर्मा, महामंत्री उरमू
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नए ट्रेड यूनियन कोड को लेकर हमारा विरोध जारी है। नई पीढ़ी को तय करना है कि उन्हें अपने अधिकारियों के लिए किस तरह लड़ाई लड़नी है। उनके वोट और उनकी आवाज से ही आगे का फैसला हो सकेगा। कुल मतों का 51 प्रतिशत पाना बेहद कठिन है।
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- राजेश चौबे, मंडल मंत्री, नरमू
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