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Moradabad News: घर बैठे मरीज अब नहीं बना पा रहे ओपीडी का पर्चा

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मुरादाबाद। जिला अस्पताल की ओपीडी का पर्चा घर बैठे नहीं बन रहा है। लोगों की सुविधा के लिए एक माह पहले लॉन्च हुआ ओआरएस पोर्टल काम नहीं कर रहा है। मरीजों के पास लाइन में लगकर पर्चा बनवाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। रोजाना 1500 से ज्यादा की ओपीडी होने के कारण पंजीकरण काउंटरों पर लंबी कतारें लग रही हैं।
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स्वास्थ्य विभाग ने सितंबर में जोरशोर से ओआरएस पोर्टल लॉन्च किया था। दावा किया गया कि मरीज का मोबाइल नंबर डालने के बाद नाम, उम्र, पता आदि विवरण भरना होगा। जिस विभाग में दिखाना है उसे चयन करने के बाद पर्चा बन जाएगा। मरीज घर पर ही इसका प्रिंट भी ले सकते हैं। विभाग का दावा था कि पर्चा बनने के बाद मरीज सीधे डॉक्टर के केबिन में जाकर दिखा सकता है। फिलहाल यह सभी दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। कुछ विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि पोर्टल लॉन्च होने के बाद ठीक से चला ही नहीं। अस्पताल में एक भी मरीज खुद पर्चा बनाकर नहीं पहुंचा।
नई व्यवस्था को विभाग ने नेक्स्ट जेन का नाम दिया। इसके मुताबिक मरीजों की पैथोलॉजी रिपोर्ट भी मोबाइल पर भेजने का दावा किया गया। जिला अस्पताल में करीब 450 लोग रोजाना जांच करा रहे हैं। इनमें से बमुश्किल 100 लोगों के मोबाइल पर ही एसएमएस पहुंचता है। लोगों को जांच कराने के बाद रिपोर्ट लेने दोबारा आना पड़ता है।
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एक ही फिजिशियन, जूनियर डॉक्टरों के भरोसे ओपीडी
जिला अस्पताल से डॉ. रामकिशोर का तबादला और डॉ. एनके मिश्रा के सेवानिवृत्त हुए भी तीन माह बीत गए हैं। अब तक फिजिशियन की किल्लत का समाधान नहीं मिल पाया है। फिलहाल डॉ. आशीष सिंह अकेले फिजिशियन हैं। मेडिसिन विभाग में हर दिन 400 मरीज आ रहे हैं। ऐसे में जूनियर डॉक्टर ही लंबे समय तक बैठकर ओपीडी में मरीजों को देखते हैं। फिजिशियन को वार्ड में भर्ती मरीजों को भी देखना पड़ता है। अस्पताल प्रबंधन इस समस्या के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र लिख चुका है लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। एनएचएम के जरिए चुने गए डॉक्टरों ने ज्वाइन करने से ही मना कर दिया।

इस तरह बढ़ रहा है ओपीडी में मरीजों का आंकड़ा
तारीख - मरीजों की संख्या
28 अक्तूबर - 1551
27 अक्तूबर - 1755
25 अक्तूबर - 1430
24 अक्तूबर - 500
23 अक्तूबर - 648

वर्जन
नया सॉफ्टवेयर होने के कारण कई तकनीकी समस्याएं आ रही हैं। गति धीमी होने के कारण भी लोगों का पंजीयन नहीं हो पा रहा है। प्रदेश के सभी जिलों में ऐसी परेशानी आ रही है। इन्हें सुधारने के लिए काम किया जा रहा है।
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- डॉ. संगीता गुप्ता, एसआईसी
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