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अहलेबैत की मुहब्बत के बगैर नहीं मिलेगी जन्नत : मशहदी

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कुंदरकी। बनारस से आए मौलाना सय्यद युसूफ अहमद मशहदी ने कहा कि अहलेबैत की मुहब्बत के बगैर जन्नत नहीं मिलने वाली है। नगर में काजी सय्यद जैगम अली नकवी के अजाखाने मे आयोजित मजलिस में सय्यद अली रिजवी ने मरसिया पढ़ा।
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मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना सय्यद युसूफ अहमद मशहदी ने कहा कि रसूल-ए-करीम और अहलेबैत की जिंदगी हमारे लिए नमूना-ए-अमल है। रसूल-ए-करीम और अहलेबैत की मंजिलत को समझने के लिए इल्म का होना जरूरी है। बिना अहलेबैत की मुहब्बत के कोई इबादत कुबूल नहीं होने वाली है और बिना अहलेबैत के जन्नत नहीं मिलने वाली है।
उन्होंने नवासा-ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन की शहादत बयान की तो अजादारों की आंखें नम हो गईं। इससे पूर्व सय्यद शाहजहां हुसैन काजमी के अजाखाने पर मजलिस हुई। मजलिसों में अंजुमन अकबरी, अंजुमन शाने हैदरी, अंजुमन अल मूर्तजा ने नोहाख्वानी की। वहीं नगर में सोमवार की देर रात शिया व अहले सुन्नत समुदाय द्दारा मेहंदी का जुलूस निकाला जाएगा और 4 अगस्त यानि मंगलवार को नगर में शिया व सुन्नी समुदाय हजरत इमाम हुसैन के चेहल्लुम का मुख्य मातमी जुलूस निकाल कर नगर स्थित कर्बला पर ताजिये दफन करेंगे।
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