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Moradabad News: पाकबड़ा/ कहानी यूट्यूबरों के गांव की- 2

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मुरादाबाद। जो सिलसिला छह साल पहले मुट्ठी भर युवकों ने खेल-खेल में शुरू किया था, वह अब पाकबड़ा कस्बे में बड़े कारोबार की शक्ल अख्तियार कर चुका है। कस्बे के सैकड़ों युवक यूट्यूब के लिए तरह-तरह का कंटेंट तैयार कर करोड़ों व्यूज के जरिये ठीक-ठाक कमाई कर रहे हैं। यह युवा न केवल तरह-तरह के विषयों पर वीडियो बनाते हैं, बल्कि शहर के तमाम छोटे-बड़े दुकानदारों के प्रमोशनल वीडियो भी तैयार करते हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट हैंडल करने में भी इनकी अहम भूमिका है।
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टू इन वाइन्स नाम से यूट्यूब चैनल चलाने वाले कस्बे के शाने आलम कहते हैं, देखिए यूट्यूब की दुनिया इतनी आसान भी नहीं है। यहां एड़ियां घिसनी पड़ती हैं, तब कहीं जाकर पहचान बनती है। एक बार पहचान बन जाए तो फिर कमाई के रास्ते अपने आप खुल जाते हैं। आज उनके पास 1.73 मिलियन सब्सक्राइबर्स हैं। शाने आलम यूट्यूब की कमाई का ठीक-ठाक आकंड़ा तो नहीं बताते लेकिन उनकी लाइफ स्टाइल इस बात की चुगली कर देती है कि धंधा चोखा चल रहा है। शाने आलम के पास बकायदा 20 लोगों की टीम है और वह वीडियो कंटेंट में विविधता के लिए आसपास के शहरों में जाकर भी शूट करते हैं। जियान याद करते हैं कि उनकी यूट्यूब से पहली कमाई 7200 रुपये की हुई थी। दोस्तों ने तय किया था कि इसे गरीबों में दान करना है। अब यूट्यूब से इतनी कमाई हो जाती है कि इससे परिवार चल सके। साथ ही टीम में काम करने वाले सभी लोगों का खर्च निकल जाता है।



राउंड टू हेल के जियान सैफी, नाजिम, वसीम और टू इन वाइन्स के शाने आलम की तरह मोहम्मद नदीम, जावेद आदि तमाम युवाओं ने यूट्यूब को रोजगार का साधन बना रखा है। हालांकि इन युवाओं में लड़कियों की संख्या कम है। राजिका अब्बान ऑफिशियल जैसे एक-दो चैनल ही हैं जहां लड़कियां सक्रिय हैं। और बाकायदा कैमरे के सामने आ रही हैं। अलग-अलग टीमों के साथ अन्य लड़कियां जरूर हैं लेकिन इनमें से ज्यादातर पृष्ठभूमि में रहकर ही भूमिका निभा रही हैं।
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बुध बाजार में कपड़े का कारोबार करने वाले प्रीतम खन्ना ने पिछले दिनों ग्राहकों की संख्या बढ़ाने के लिए ऐसे ही एक यूट्यूबर का सहारा लिया। उनकी कुछ चटपटी रील्स वायरल हुईं तो शहरियों की दिलचस्पी बढ़ी। प्रीतम की देखा-देख कई अन्य दुकानदारों ने भी यह नुस्खा अपनाया। आम तौर पर वीडियो या रील छोटे दायरे में ही सिमट कर रह जाती हैं लेकिन कभी कोई रील वायरल हुई तो बंदा पूरी दुनिया में छा जाता है। मंडी चौक में मूंग की दाल का ठेला लगाने वाले राम प्रकाश की एक रील पिछले दिनों इतनी वायरल हुई कि उन्हें कुछ दिनों के लिए वीआईपी का दर्जा मिल गया। पाकबड़ा के तमाम यूट्यूबर व्यूज की तलाश में स्पांसर न मिलने पर खुदाई खिदमतगार बनने से भी परहेज नहीं करते।



प्रदेश बाल कल्याण आयोग के पूर्व अध्यक्ष विशेष गुप्ता इन बदलावों को सकारात्मक ढंग से देखने की पुरजोर वकालत करते हैं। कहते हैं- इस दौर के युवा सिर्फ सरकारी नौकरी के भरोसे नहीं रहना चाहते। वह आगे बढ़ने के नए रास्ते तलाश रहे हैं। हालांकि पाकबड़ा जैसे कस्बे में इतनी बड़ी संख्या में यूट्यूबरों की सक्रियता का कोई ठोस कारण उन्हें समझ नहीं आता। कहते हैं- यह संयोग भी हो सकता है।
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