सरकार और परिषदीय शिक्षा विभाग बच्चों की शिक्षा को लेकर कितना असंवेदनशील और उदासीन है इसका अंदाजा इसी बात से लगाए जा सकता है कि दस हजार से अधिक आबादी वाले क्षेत्र में एक अदद प्राथमिक विद्यालय है। वहीं यहां एक भी जूनियर हाईस्कूल नहीं है।
करूला क्षेत्र में दस हजार से अधिक आबादी रहती है। लेकिन यहां शिक्षा के नाम पर रहमत नगर में मात्र एक प्राथमिक विद्यालय है। ऐसे में यहां के लोगों को मजबूरन अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाना पड़ता है। जबकि इस क्षेत्र में अधिकांश लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में स्कूलों की और अधिक आवश्यकता है।
यहां विभागीय लापरवाही के कारण जूनियर हाईस्कूल का संचालन नहीं होता। प्राथमिक विद्यालय रहमत नगर के साथ ही ठीक इसके सामने स्कूल के लिए दो कमरों का भवन भी तैयार किया गया था। लेकिन विभाग ने इन कमरों में स्कूल शुरू नहीं किया। करीब 12 साल से यहां विभाग के दो भवन है।
यह भवन अब जर्जर स्थिति में आ गया है लेकिन यहां स्कूल शुरू नहीं किया गया। अगर पांचवीं से आठवीं तक की सरकारी शिक्षा की व्यवस्था होती तो अभिभावकों को मजबूरन पैसा खर्च कर निजी स्कूलों में अपने बच्चों को नहीं पढ़ाना पड़ता। वहीं जहां विभाग के पास अपना भवन है वहीं नगर क्षेत्र के अधिकांश स्कूल किराए के भवनों में चल रहे हैं।
किराए के भवन जर्जर स्थिति में है। ऐसे में जर्जर भवनों में बैठने को मजबूर बच्चों को इन दो कमरों के भवन में शिफ्ट किया जा सकता है।
प्राथमिक विद्यालय के साथ ही दो कमरों का भवन बनकर तैयार किया गया था। लेकिन जूनियर हाईस्कूल के लिए चार कमरों की जरूरत होती है। इसलिए स्कूल शुरू नहीं हो पाया होेगा। संज्ञान में मामला आया है, अब यहां स्कूल शुरू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी
--- सुरेश त्यागी, प्रभारी बीएसए