स्वीकृत क्षमता से पांच गुना से भी अधिक बंदियों के बोझ से हांफ रही जेल में भी सत्ताधारी दल के पूर्व विधायक को वीवीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। जेल की एक पूरी बैरक पर सपा सरकार बनने के बाद से ही पूर्व विधायक उस्मान का कब्जा चला आ रहा है। जबकि बाकी की 18 बैरकों में 3050 बंदी ठूंस ठूंसकर भरे गए हैं।
हालात ये हैं कि लेटना तो दूर बंदियों को बैरक में बैठने तक की जगह नसीब नहीं है। नतीजतन तमाम बंदियों को टायलेट में ठूंस दिया जाता है जो पूरी रात दुर्गंध के बीच बैठकर रात बिताने को मजबूर हैं। मुरादाबाद जेल की क्षमता 511 बंदियों की थी। जिसे नई बैरक बनने के बाद बढ़ाकर 611 बंदी कर दिया गया था।
जेल में छोटी बड़ी मिलाकर कुल 22 बैरक हैं। इनमें से एक अस्पताल बैरक है। बच्चा बैरक और मुलायजा बैरक को हटा दें तो 19 बैरक बचती हैं। इनमें से भी एक महिला बैरक है और एक बुजुर्ग बैरक। कभी मुलायजा बैरक के तौर पर इस्तेमाल होती रही बैरक नंबर दो पर पिछले करीब चार साल से पूर्व विधायक उस्मान उल हक का कब्जा है।
जेल सूत्रों का कहना है कि इस बैरक में आजीवन कारावास की सजा काट रहे सपा के पूर्व विधायक उस्मान उल हक अकेले रहते हैं। तमाम अफसरों का आए दिन जेल में दौरा होता है। सरप्राइज छापामारी की जाती है।
लेकिन बंदियों की पांच गुना भीड़ से जूझ रही जेल में एक पूरी की पूरी बैरक पूर्व विधायक को क्यों दी गई, इस ओर कभी किसी अफसर का ध्यान नहीं जाता। कुछ दिन पहले बीमार होने के बाद उस्मान अस्पताल चले गए। उनके जेल जाने के बाद उनके तीन सिपहसलार जेल में उनकी बैरक को संभाले हुए हैं। बाकी की बैरकों पर गौर करें तो हरेक बैरक में औसत 200-200 बंदी ठूूंस - ठूंसकर भरे गए हैं।