मुरादाबाद। कागजों में विकास की रफ्तार दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। अफसर भी इसी कागजी नाव पर सवार होकर अपनी पीठ थपथपा लेते हैं। यही वजह है कि सड़क-सफाई, साफ पानी जैसी मूल सुविधाओं से दूर दुश्वारियों में घिरे ग्रामीणों का सच अफसरों की जानकारी में ही नहीं आता। गांवों में दौरे-मुआयने अब अफसरों की प्राथमिकता नहीं हैं। पहले गांव में रात्रि विश्राम, फिर गांव-गांव मासिक चौपाल पर भी अमल नहीं हुआ। पूछने पर जल्द रोस्टर बनाने की बात कही जा रही है।
हद तो यह है कि मंडल मुख्यालय मुरादाबाद से महज दाे-तीन किमी दूर बसे सैदपुर खाद में साल 2013 में रामगंगा की बाढ़ से गांव ने जो-जो खोया था, उसकी अब तक बहाली नहीं हो सकी है। 13 साल में न स्कूल बना और न ही नाली-सड़क की सुविधा मिली। यह आलम तब है, जबकि इस गांव की मुख्य सड़क से अधिकारियों की गाड़ियां लगभग हर दिन गुजरती हैं।
सैदपुर खादर गांव अधिकारियों की अनदेखी का एक नमूनाभर है। जिले में 643 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें कई ऐसी पंचायतें हैं, जहां के मझरे बदहाली का दंश झेल रहे हैं। इतने पर भी आला अफसर तो छोड़िए पंचायत सचिव तक नहीं पहुंचे। इनमें से अधिकांश गांवों में न सड़क है, न बच्चाें के लिए स्कूल। विकास से दूर इन गांवों के लोगों को अफसरों के आने का इंतजार है। उम्मीद है कि जब समस्याओं से उनका सीधा सामना होगा तो शायद कागजी विकास के चश्मे से बाहर निकलकर वे (अफसर) समाधान के हल पर गौर करेंगे।
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- गांवों में अधिकारियों के रात्रि विश्राम के नियम नहीं हैं। ग्राम चाैपाल लगाने का नियम है। इसका जल्द रोस्टर जारी किया जाएगा। - अनुज सिंह, डीएम
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गांव बसा दिया पर बदहाली देखने नहीं आया कोई
- 13 साल पहले आई बाढ़ के बाद गांव को इस्लामनगर मार्ग पर बसा दिया था। उस समय प्रशासनिक अधिकारियों का जमावड़ा था। इसके बाद कोई अधिकारी झांकने नहीं आया। - ऋषिपाल, सैदरपुर खाद
- गांव में सड़कें नहीं हैं। घरों तक बिजली पहुंचाने को दो पोल लगे। बिजली निगम ने पोल लगाने का 40 हजार चार्ज वसूला। कभी कोई अधिकारी गांव में निरीक्षण को नहीं आया। - अश्वनी कुमार, सैदरपुर खाद
- गांव में सड़क, पानी और स्कूल की सुविधा नहीं है। बच्चों को तीन किमी दूर इस्लामनगर में पढ़ने जाना पड़ता है। 13 साल में गांव में सड़क तो दूर एक स्कूल भी नहीं बना। - जितेंद्र सिंह, सैदरपुर खाद
- अधिकारी तो गांव में आना जरूरी नहीं समझते हैं, क्योंकि गांव इस्लामनगर में लगता है। पंचायत कार्यालय भी वहीं है। अगर कोई आता भी है तो वहीं तक सीमित रह जाता है। - केदार लाल, सैदरपुर खाद
- इस्लामनगर ग्राम पंचागत से गांव सैदपुर खादर जुड़ा है। इस गांव को तीन हिस्सों में बांटा गया है। तीनों हिस्सों में दो सड़कें बनी हैं। वहीं अन्य के लिए बजट नहीं है। बजट की संस्तुति होते ही निर्माण कार्य शुरू होगा। - बबलू सैनी, ग्राम प्रधान, सैदरपुर खादर
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विकास के नाम पर सिर्फ तीन प्रधानामंत्री आवास, तीन शाैचालय
मूंढापांडे। ग्राम पंचायत समदा रामसहाय का गांव खता को अब तक सड़क नहीं मिली। ग्रामीणों ने 2019 में लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया लेकिन यहां विकास नहीं हुआ। आज इस गांव में कोई आला अफसर तो दूर पंचायत सचिव तक नहीं आया।
- करीब एक हजार की आबादी वाले इस गांव में विकास के नाम पर सिर्फ तीन प्रधानमंत्री आवास और तीन शौचालय हैं। - ब्रह्मपाल
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- विकास तो दूर गांव में मुख्य सड़क तक नहीं है बारिश होते ही कीचड़ का राज होता है, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चे फिसल कर गिर जाते है। एक भी इंडिया मार्का हैंडपंप तक नहीं है। - जीतमल
- गांव की गलियां कच्ची हैं। सरकारी इमदाद के नाम पर एक प्राथमिक विद्यालय जरूर है। इससे आगे की पढ़ाई के लिए ईलर रसूलाबाद या सात किलोमीटर दूर दलपतपुर जाना पड़ता है। - असलीम
- गांव में नारकीय जिंदगी जीने से तंग आकर 2019 में ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार कर दिया था लेकिन आज तक किसी आला अफसर ने इस गांव में पहुंचकर बदहाली का जायजा नहीं लिया है। - अरमान
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अधिकारी आते नहीं, समस्या किसे बताएं
बिलारी। ब्लाॅक के ग्राम पंचायत बगपुरा के गांव नगला नस्सू में न तो स्कूल और न तो स्वास्थ्य उपकेंद्र है। शुरुआती शिक्षा के लिए आंगनबाड़ी केंद्र भी नहीं हैं। रास्ते और नालियां बदहाल हैं। गांव के दोनों संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हैं।
गांव के वीरपाल सिंह, अतरकली, डम्बर सिंह, क्रेशपाल सिंह, शिशुपाल सिंह का कहना है कि जब अधिकारी गांव में आते ही नहीं तब वह अपनी समस्या किसे बताएं। जनप्रतिनिधि भी उनके गांव में नहीं आते हैं। एडीओ पंचायत शकील अहमद का कहना है कि ग्राम पंचायत बगपुरा की बैठकों में विकास को लेकर जो योजनाएं बनी हैं, उन्हीं के आधार पर और बजट के आधार पर गांवों में विकास कार्य कराए गए हैं। संवाद
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नगला बनवीर : समस्याओं की भरमार पर कोई सुनने को नहीं तैयार
पाकबड़ा। गांव नगला वनवीर की अधिकांश सड़कें जर्जर हैं। पेयजल योजना अधूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार ने पाइपलाइन तो बिछा दी, लेकिन टंकी का निर्माण अधूरा छोड़कर चला गया। लोगों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा भी नहीं मिल पा रही।
गांव के कनक पाल सिंह ने बताया कि सड़कों की हालत इतनी खराब है कि आए दिन बच्चे गिरकर घायल हो ते हैं। रविंद्र कुमार ने बताया कि होली का मैदान जाने वाला रास्ता पूरी तरह कीचड़ भरा है। होली नजदीक होने के बावजूद कोई सुधार नहीं कराया गया। लोगों को और परेशानी उठानी पड़ेगी।
नरेश कुमार ने कहा कि कंपोजिट विद्यालय जाने वाले रास्ते पर बारिश में जलभराव हो जाता है, जिससे बच्चों को जलभराव से जूझकर स्कूल जाना पड़ता है। संवाद
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गांव के रास्ते कच्चे, बाढ़ से जूझते हैं ग्रामीण
कुंदरकी। ग्राम पंचायत बाकीपुर में शामिल गांव नगला जटनी की 1200 आबादी को मूल सुविधाएं तक मुहैया नहीं हैं। अधिकांश रास्ते कच्चे हैं। बारिश होने पर रास्तों पर कीचड़ का राज होता है। ग्रामीण हर साल बाढ़ से भी जूझते हैं। बाढ़ के दाैरान नगला जटनी से संपर्क कट जाता है। गांव के अवधेश कुमार, भारत सिंह, दलवीर सिंह, सुनील यादव, रियासत अली, रविंद्र सिंह, श्योराज सैनी, वाहिद अली का कहना कि अधिकारी गांव की हालत देखने नहीं आते। संवाद