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Moradabad News: और अफसरों तक भी पहुंच सकती है कागजी वेदी की जांच की आंच

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मुरादाबाद। पहले से विवाहित 35 जोड़ों को फिर वेदी पर बैठाकर दोबारा ब्याह कराने के घोटाले में शासन की जांच में और चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आ सकते हैं। फर्जी शादी की वेदी की आंच में जिलास्तरीय जांच की रिपोर्ट और आला अफसरों को भी झुलसा सकती है। डीएम की ओर से शुरू हुई कार्रवाई में कुछ और पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
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सामूहिक विवाह योजना में घोटाले पर शुरू हुई कार्रवाई के पहले चरण में आठ अधिकारी-कर्मचारी लपेटे में आए हैं। इसमें छह ग्राम पंचायत सचिव निलंबित कर दिए गए हैं, जबकी सहायक विकास अधिकारी (एडीओ) समाज कल्याण के निलंबन की संस्तुति डीएम ने कर दी है। साथ ही मूंढापांडे के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) का वेतन रोकने के निर्देश के साथ ही विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं।



अधिकारी स्वीकार कर रहे हैं कि गनीमत है कि दोबारा शादी के खेल से जुड़े जोड़ों के खातों में अभी सरकारी अनुदान की राशि शिफ्ट नहीं हुई है। धनराशि ट्रांसफर होने से पहले ही सच सामने आ गया। अगर धनराशि शिफ्ट हो गई होती तो इसकी वसूली चुनौती बनती। सरकारी प्रावधान के तहत 60 हजार रुपये प्रति जोड़ा अनुदान दिया जाता है। इस हिसाब से 35 जोड़ों क खाते में 21 लाख रुपये का भुगतान तय था। घोटाले का सच सामने आने के बाद अपात्र जोड़ों को दिए गए उपहारों को वापस लिया जाएगा या नहीं, इस पर अभी निर्णय नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि अब शासन स्तरीय जांच की रिपोर्ट आने के बाद अनुदान भुगतान और उपहारों के संदर्भ में नीति तय होगी।
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अमर उजाला में हर नई खबर से घोटाले की परत-दर-परत खुलने पर जहां डीएम ने सख्त जांच और फिर कार्रवाई शुरू कर दी, वहीं प्रदेश के समाज कल्याण अधिकारी असीम अरुण के निर्देश पर जारी शासन (एसआईटी) की जांच कुछ अन्य रहस्यों से भी परदा हटा सकती है।

शासन की टीम तीन दिन जिले में बिताने के बाद लखनऊ वापस हो गई है। इस टीम को 12 फरवरी तक जांच रिपोर्ट सौंपनी है।

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मूंढापांडे की 562 शादियों में सर्वाधिक गड़बड़ी


सामूहिक विवाह योजना में घपले पर मूंढापांडे और कुंदरकी की सभी 808 शादियों की जांच हुई। इनमें मूंढापांडे ब्लॉक की 562 शादियों में सर्वाधिक गड़बड़ी मिलीं, शेष 828 शादियों में 10 फीसदी का सत्यापन किया गया। इनमें कोई गड़बड़ी न मिलने की बात कही जा रही है। मूंढापांडे ब्लॉक क्षेत्र के पांच दिसंबर को होने वाले विवाह समारोह में दो व तीन दिसंबर की रात एक साथ तीन सौ नामों की सूची शामिल कर दी गई। बताते हैं कि इस सूची में सिफारिशी जोड़ों के नाम शामिल थे।



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जोड़े तलाशने वाली की तलाश



कहा जा रहा है कि सामूहिक विवाह योजना की समृद्धि कागजों में दर्शाने के लिए कुछ लोग जोड़े तलाशने का काम करते थे। इस मामले में इस तरह की भूमिका निभाने वाली महिला की तलाश है। इसी तरह इंतजामों के लिए आगे रहने वाले ठेकेदारों पर भी गाज गिर सकती है। बताते हैं कि इस घपले में जोड़ों से सांठगांठ उनके नाम विवाह सूची में शामिल कराने के लिए कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों ने वाकायदे जिम्मेदारी ली थी।



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पहले भी हुई थी गड़बड़ी पर कार्रवाई नहीं

कार्रवाई की जद में आए एडीओ समाज कल्याण के क्षेत्र में पिछले साल भी मुख्यमंत्री विवाह योजना में उपहार वितरण में गड़बड़ी पाई गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। सामूहिक विवाह समारोह में इस बार मनमानी के कारण एक आयोजन में जोड़ों की संख्या 1636 तक पहुंच गई, जबकि नियमानुसार एक समारोह में 100 जोड़ों को ही शामिल करना था।



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भोजन व्यवस्था पर भी उठे थे सवाल



- विधायक रामवीर सिंह ने इस समारोह की भोजन व्यवस्था पर भी सवाल उठाया था। विधायक ने वर-कन्या पक्ष के लोगों की संख्या के सापेक्ष कम भोजन तैयार कराने की बात कही थी। सिर्फ मूंढापांडे व कुंदरकी ब्लॉक में 808 जोड़े यानी 1616 दूल्हा और दुल्हन दर्ज हुए। एक दूल्हा या दुल्हन के साथ परिवार के औसतन 10 लोग होने पर यह संख्या 16160 पहुंचती है। व्यवस्था में लगे कर्मचारियों, शादी कराने वाले पंडित जी व काजी आदि मिलाकर करीब 20 हजार लोगों की भोजन व्यवस्था होनी चाहिए थी, जबकि विधायक के अनुसार सात-आठ हजार लोगों की ही व्यवस्था थी।



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अब तक अधूरी उपहारों की आस



सामूहिक विवाह समारोह में शामिल 50 दुल्हनों को चांदी के आभूषण दिए ही नहीं। उन्हें न पायल मिली, न ही बिछुआ, जबकि प्रत्येक दुल्हन को कम से कम 30 ग्राम चांदी के आभूषण देने थे। इसके अलावा 139 जोड़े ऐसे भी थे, जिन्हें समारोह में गद्दे नहीं दिए गए। इसके अलावा 37 जोड़े बिना डिनर सेट के ही घरों को लौट गए। इस तरह की शिकायतें समारोह वाले दिन से लेकर आज तक बनी हुई हैं।
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