अमरोहा। जिले में बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन हालात चिंताजनक बने हुए हैं। वर्ष 2025 की तुलना में वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में ही कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। इससे पोषण योजनाओं और निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में पूरे साल के दौरान 540 कुपोषित और 93 अति कुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए थे। वहीं, वर्ष 2026 में जनवरी से मई तक ही 1025 कुपोषित और 175 अति कुपोषित बच्चे मिल चुके हैं। बढ़ती संख्या से आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जिले में 1430 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें करीब 1,15,399 बच्चे पंजीकृत हैं। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग पर गर्भवती, धात्री महिलाओं और बच्चों को कुपोषण से बचाने की जिम्मेदारी है। इसके लिए पूरक पोषण आहार, हॉट कुक्ड मील और अन्य सरकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन बढ़ते आंकड़े बताते हैं कि इन योजनाओं का अपेक्षित असर जमीनी स्तर पर नहीं दिख रहा है।
शहर/ब्लॉकअति कुपोषित-कुपोषित
अमरोहा शहर-53262
अमरोहा देहात-2093
मंडी धनौरा-19227
गजरौला-44240
गंगेश्वरी-1218
हसनपुर-1054
जोया-17131
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कुपोषित बच्चों के आहार
- तीन साल के बच्चे को 24 घंटे में दो कप दूध, दो कटोरी दाल, 3-4 कटोरी मिक्स अनाज छह से आठ बार खिलाना ठीक रहता है।
- बच्चों को साफ पानी ही देना चाहिए।
- कोई भी संक्रमण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- छह माह के बच्चों को मां के दूध के अलावा दो कटोरी मसला हुआ खाना दिनभर में थोड़-थोड़ा कर के खिलाना चाहिए।
- आठ से दस महीनों के बच्चों को मां के दूध के अलावा तीन कटोरी प्रोटीन युक्त खाना दिनभर में खिला देना चाहिए।
- हर मौसम में विभिन्न मौसमी फलों या उनके रस को बच्चों को दें।
कुपोषण के लक्षण
- जन्म के समय दो किलो से कम वजन होना
- बच्चे में चिड़चिड़ापन और सुस्ती रहना।
- बार-बार बीमारियों की चपेट में आना।
- बच्चे में उम्र के साथ वजन न बढ़ना।
- कई बच्चे ऐसे होते हैं, जो खाया पिया नहीं पचा पाते।
इस तरह करें बचाव और बरतें सावधान
- रोगों से बचाने के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- नौ माह की आयु तक बच्चे को मां अपना दूध पिलाएं।
- जन्म से लेकर दो साल तक बच्चे रोज तीन कप दूध दें।
- रोजाना दो कटोरी दाल और दलिया दिया जाए।
- बच्चे को उबला हुआ पानी ठंडा कर पिलाएं।
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गर्मी और बरसात के मौसम में बीमारियों का असर बच्चों की सेहत पर पड़ता है। 0-6 साल तक बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को पुष्टाहार का वितरण भी किया जाता है। इसके लिए महिलाओं को जागरूक भी किया जाता है।
-ज्ञान प्रकाश तिवारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी