मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश गन्ना सर्वेक्षण नीति-2026-27 के तहत मंडल में करीब पांच हजार से अधिक गांवों में गन्ना सर्वे के लिए 814 टीमें लगाई गई हैं। अब गन्ना आयुक्त ने सर्वेक्षण में अंत:फसली खेती, एग्रो-फाॅरेस्ट्री और फार्म फाॅरेस्ट्री के तहत बोई गई फसलों की बुवाई का विवरण भी अनिवार्य रूप से शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
उप गन्ना आयुक्त हरपाल सिंह ने बताया कि प्रदेश के गन्ना एवं चीनी आयुक्त की ओर से पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना सर्वेक्षण नीति जारी की जा चुकी है, मुरादाबाद परिक्षेत्र में गन्ना सर्वेक्षण चल रहा है, जो 30 जून तक चलेगा। गन्ना सर्वेक्षण कार्य को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक एवं तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से अधिकारियों को निर्देशित किया गया है, कि सर्वेक्षण के दौरान खेत में मौजूद वास्तविक गन्ना किस्म का ही अंकन कराना सुनिश्चित कराएं, ताकि खेतों में बोई गई वास्तविक किस्मों का आंकड़ा विभाग को मिल सके। उन्होंने बताया कि मुरादाबाद परिक्षेत्र में बिजनौर जिले की दस चीनी मिलों के क्षेत्र में 377 टीमें, मुरादाबाद के चार चीनी मिल क्षेत्र में 128 टीमें, रामपुर की तीन चीनी मिल क्षेत्र में 74 टीमें, अमरोहा की तीन चीनी मिल क्षेत्र में 143 टीमें तथा संभल की तीन चीनी मिल क्षेत्र में 92 टीमों सहित कुल 814 टीमें लगाई गई हैं, जो करीब पांच हजार से अधिक गांवों में सात लाख से अधिक किसानों के गन्ने का सर्वे करेंगी। आयुक्त के अनुसार सर्वेक्षण में अब केवल गन्ने का रकबा ही नहीं, बल्कि अंत:फसली खेती, एग्रो व फार्म फाॅरेस्ट्री का भी विस्तृत विवरण दर्ज किया जाएगा। इसका बड़ा लाभ यह होगा कि किसानों की आय बढ़ाने वाली फसल प्रणालियों का वास्तविक आंकलन संभव हो पाएगा और ट्रेंच व जोड़ीदार पंक्ति विधि से की गई गन्ना बुवाई के भी सही आांकड़े मिल पाएंगे, जिससे यांत्रिक गन्ना कटाई में मदद मिलेगी।
गन्ना किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यालय स्तर पर टोल-फ्री किसान काॅल सेंटर 1800-121-3203 की स्थापना की गई है। कोई भी किसान इस नंबर पर 24 घंटे किसी भी समय अपनी शंका का समाधान कर सकता है।