खुद्दार, बेगुनाह मुजरिम और ‘कानून के दलाल’ जैसे उपन्यास लिखने वाला लेखक अनिल सक्सेना आर्थिक तंगी में खुद ठग बन बैठा। इंटरनेट के युग में जब उपन्यास बिकने बंद हो गए तो आरोपी ने केमिकल के जरिए असली जैसे दिखने वाले नकली नोटों की छपाई का मैजिक दिखाकर ठगी शुरू कर दी।
रकम दोगुनी करने का झांसा देकर नोटों की जगह कागज की गड्डियां थमाकर उसने सैकड़ों लोगों से लाखों रुपये ठग लिए। लेकिन लेखक अनिल इस बार चूक गया। उसने ग्राहक बनी पुलिस से ही नोट दोगुने करने का सौदा कर डाला और नतीजतन अपने साथी के साथ सलाखों में पहुंच गया।
एसपी सिटी अभिषेक यादव ने बताया कि पकड़ा गया आरोपी अलि सक्सेना निवासी गोविंदनगर और अरुण निवासी गुलाबबाड़ी मूलरूप से बदायूं के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। दोनों आरोपी लोगों को रकम दोगुनी करने का झांसा देकर उन्हें कागज की गड्डियां थमा देते थे।
इसके अलावा वह केमिकल के जरिए नए नोट तैयार करने का दावा कर लोगों को केमिकल भी बेचते थे। एक सूचना पर खुद पुलिस ने इन ठगों को पकड़ने का जाल बिछाया और उनसे नए नोट तैयार करने वाला केमिकल खरीदने का बहाना कर गाड़ीखाना से गिरफ्तार कर लिया है।
आरोपियों के कब्जे से सौ-सौ के नोटों के साइज के 312 कागज के टुकडे़, आठ ‘डिफेक्टिव’ सौ-सौ के नोट और चार सौ रुपये बरामद किए हैं। पूछताछ के दौरान आरोपी अनिल ने बताया कि ठगी के इस धंधे का वह ही मास्टरमाइंड है, दो बार वर्ष 1984 और 1992 में बदायूं पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने पर जेल भी जा चुका है। उस दौरान भी वह ठगी के आरोप में जेल भेजा गया था।