पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान
सांसद आजम खां के जौहर ट्रस्ट से करीब 160 एकड़ जमीन को सरकार पुनर्ग्रहीत कर सकती है। इस संबंध में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) की ओर से ट्रस्ट को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है। इस मामले में अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।
जौहर ट्रस्ट के नाम पर लगभग 160 एकड़ जमीन खरीदी गई थी।मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार की कैबिनेट एक के फैसले में जौहर ट्रस्ट द्वारा खरीदे जाने वाली जमीन पर स्टांप शुल्क से छूट दी गई थी। ट्रस्ट के नाम पर जो 160 एकड़ जमीन की खरीद गई है उसके लिए स्टांप
शुल्क का भुगतान नहीं किया गया है। कैबिनेट से जो प्रस्ताव पास हुआ था उसमें एक शर्त भी थी कि ट्रस्ट की ओर से लोकहित से जुड़े कार्य कराने होंगे।
अल्पसंख्यक, गरीब बच्चों की निशुल्क शिक्षा देनी होगी। आरोप है कि जौहर ट्रस्ट ने लोकहित के कामों के नाम पर सरकार से करोड़ों की जमीन ली, लेकिन इसका व्यावसायिक इस्तेमाल किया। इस मामले की शिकायत भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना ने की थी। शिकायत की जांच तत्कालीन एसडीेएम सदर पीपी तिवारी ने की थी।
जांच रिपोर्ट मेें यह बात सामने आई थी कि ट्रस्ट ने इस जमीन पर जौहर यूनिवर्सिटी का निर्माण कराया, लेकिन पिछले दस सालों में चैरिटी का कोई काम नहीं हुआ। इसी आधार पर रिपोर्ट में एसडीएम सदर ने जौहर ट्रस्ट को दी गई 160 एकड़ जमीन वापस लेने की संस्तुति की है। एसडीएम की रिपोर्ट पर डीएम की कोर्ट में वाद दर्ज कर लिया गया था।
बाद में सुनवाई के लिए वाद को एडीएम (प्रशासन) की कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान एडीएम ने जौहर ट्रस्ट को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।