सीएम योगी आदित्यनाथ, समाजवादी पेंशन योजना
शुरुआत से विवादों में रही अखिलेश राज की समाजवादी पेंशन योजना पर ब्रेक लगा दिया गया है। इस योजना को शुरू करने का मकसद कुछ भी रहा हो, लेकिन जिस तरह से रेवड़ी की तरह पेंशन बांटी गई, उससे साफ है कि इस योजना का लाभ पात्रों को न देते हुए वोटरों को ही दिया गया था।
ग्राम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य और विधायकों ने अपने ही चहेतों के नाम सूची में चढ़वाए। इतना ही नहीं सपा सरकार के छुटभैय्या नेता तक अपनी सूचियां लेकर समाज कल्याण विभाग के दफ्तर तक पहुंच रहे थे। तमाम शिकायतें और विरोध के बाद भी सपा सरकार ने समाजवादी पेंशन योजना में धनराशि जारी कर दी थी।
अखिलेश शासन में समाजवादी पेंशन योजना शुरू की गई थी। पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मुखिया को आर्थिक मदद के मकसद से यह योजना की शुरुआत की थी। हर माह पांच सौ रुपये देने का ऐलान किया गया था।
मुरादाबाद में 82797 लाभार्थियों की सूची तैयार की गई थी। जिसे शासन को भेजा गया। लेकिन 80147 लाभार्थी ही इस योजना का लाभ उठा पाए। बाकी नामों को जांच के बाद सूची से निकाल दिया गया था। लेकिन इस योजना में बड़ी बात ये रही कि कुछ को छोड़ दिया जाए, तो अधिकांश ऐसे लोगों को इस योजना का लाभ दिया गया था।
कहीं न कहीं लाभार्थी सरकार के किसी न किसी व्यक्ति व नेता और जनप्रतिनिधि से जुड़ा हुआ था। शुरुआत से ही इस योजना पर सवाल उठ रहे थे। लेकिन शासन ने योजना को जारी रखा। समाजवादी पेंशन को अपात्रों में रेबड़ी की तरह बांट दिया गया था।
अब नई सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया है। खुद समाज कल्याण विभाग के सूत्रों का दावा है कि जब से ये योजना शुरू हुई थी। तमाम नेता और जन प्रतिनिधि अपने अपने चहेतों की सूचियां थमा जाते थे। विभाग के लोग भी परेशान हो गए थे। जिसका नाम सूची में शामिल नहीं करते थे।