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Moradabad News: सड़कें न नालियां... शांति नगर वालों को शांति से नहीं रहने देती बरसात

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मुरादाबाद। लाइनपार के वार्ड-37 स्थित शांति नगर कॉलोनी आज भी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रही है। यहां कई गलियां ऐसी हैं, जहां न सड़क बनी है और न ही जल निकासी के लिए नालियां। बारिश शुरू होते ही गलियां कीचड़ और जलभराव से भर जाती हैं। लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते और नौकरीपेशा लोगों के सामने काम पर जाने में संकट खड़ा हो जाता है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 10 साल से कॉलोनी में रह रहे हैं, लेकिन विकास के नाम पर अब तक सिर्फ आश्वासन मिले हैं। बरसात में घरों के बाहर गंदा पानी जमा रहता है, जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। सांप और बिच्छू घरों तक पहुंच जाते हैं, जिससे परिवार हर समय डर के साये में जीने को मजबूर है। कॉलोनी के पास ही एमडीए का सतपुड़ा एन्क्लेव बना है, जहां 150 से अधिक आवास वर्षों से खाली पड़े हैं। सुनसान पड़े इन मकानों के कारण असामाजिक तत्वों का डर भी लोगों को सताता है। शांति नगर में सड़क न होने से अधिकांश लोग मजबूरी में सतपुड़ा एन्क्लेव के रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। बारिश के दिनों में यह रास्ता भी परेशानी बढ़ा देता है।
लोगों का कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन हालात जस के तस हैं। उनका आरोप है कि हर चुनाव में विकास के वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही शांति नगर फिर उपेक्षा की अंधेरी गली में छोड़ दिया जाता है। अब लोगों ने जल्द सड़क और नालियों का निर्माण कराने की मांग उठाई है। महापौर विनोद अग्रवाल का कहना है कि जिन गलियों में सड़क निर्माण नहीं हुआ है, जल्द ही कराया जाएगा।
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लोगों के कोट्स

बरसात शुरू होते ही घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। चारों तरफ कीचड़ और पानी भर जाता है। बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है। कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिर कब तक ऐसे हालात में रहने को मजबूर रहेंगे।
- भागवती

गली में सड़क और नाली नहीं होने से हर साल यही परेशानी झेलनी पड़ती है। बारिश का पानी कई दिनों तक भरा रहता है। मच्छर और बदबू से जीना मुश्किल हो जाता है। जिम्मेदार अधिकारी कभी यहां की हालत देखने तक नहीं आते।

- पूजा

रास्ता खराब होने से बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हैं। बारिश में फिसलकर कई लोग गिर चुके हैं। घरों तक सांप और बिच्छू पहुंच जाते हैं। कई वर्षों से विकास का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन हालात नहीं बदले।

- अलका

कॉलोनी के पास खाली पड़े एमडीए के मकानों की वजह से डर का माहौल रहता है। शाम होते ही वहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है। सड़क न होने से उसी रास्ते से आना-जाना पड़ता है, जिससे परेशानी और बढ़ जाती है।

- निक्की पाल

करीब दस साल पहले यहां मकान बनाया था। उम्मीद थी कि धीरे-धीरे सड़क और नाली बन जाएगी, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। हर बारिश में पूरी कॉलोनी कीचड़ में बदल जाती है। जिम्मेदार सिर्फ वादे करते हैं, काम नहीं।
- जेपी सागर


दीपक कुमार
हम वोट देते हैं, फिर भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। बारिश में काम पर निकलना तक मुश्किल हो जाता है। कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। अब जल्द निर्माण कराया जाए।
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- दीपक कुमार
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