मुरादाबाद। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार जमीन के इंतजार में अटका है। 101 प्रस्तावित स्वास्थ्य उपकेंद्रों में से अब तक 47 के लिए ही भूमि मिल सकी है। शेष 54 उपकेंद्रों के लिए जमीन उपलब्ध नहीं है। वहीं, मुंह, बच्चेदानी और स्तन कैंसर के संभावित मरीजों की पहचान में भी लापरवाही सामने आई है। मंगलवार को कलक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय स्वास्थ्य समिति की बैठक में डीएम अनुनय झा ने इन मामलों पर नाराजगी जताई। जिम्मेदार अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।
स्वास्थ्य उपकेंद्रों के निर्माण की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने शेष केंद्रों के लिए तहसील और ग्रामवार जमीन की जरूरत का ब्योरा तैयार कर भेजने को कहा। कैंसर के संभावित मरीजों की पहचान में संवेदनशीलता नहीं बरतने पर सभी स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों को गंभीरता से काम करने की हिदायत दी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) रघुवीर सिंह और जिला कम्युनिटी प्रोसेस प्रबंधक (डीसीपीएम) चंद्रशेखर के रवैये पर भी जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि डाटा फीडिंग समेत दूसरे कामों में लापरवाही मिलने पर इनका का वेतन रोका जाएगा। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की 19 टीमों में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली टीमों को चिह्नित कर नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए।
पर्चा बनवाने में भुगतान की परेशानी होगी दूर
जिला पुरुष अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई और सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर क्यूआर कोड सार्वजनिक रूप से चस्पा कराए जाएंगे, ताकि पर्चा बनवाते समय भुगतान में मरीजों को परेशानी न हो। बिलारी सीएचसी में मरीजों की शुरुआती जांच और प्राथमिकता तय करने के लिए ट्रायज बनाया जाएगा। संस्थागत प्रसव में लापरवाही बरतने वाली आशाओं को चिह्नित कर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में जननी सुरक्षा योजना, ई-संजीवनी, एंबुलेंस सेवाओं, क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम और नेत्र ज्योति अभियान की समीक्षा हुई। मुख्य विकास अधिकारी मृणाली अविनाश जोशी और सीएमओ डॉ. कुलदीप सिंह समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।