मुरादाबाद। मायानगर सहकारी आवास समिति की जमीन की जांच में 110 करोड़ से अधिक का घोटाला सामने आने के बाद भी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। जांच में सामने आया है कि शहर के नामी बिल्डरों ने जमीनों का वारा न्यारा करने के लिए समिति के पदाधिकारियों के साथ मिलकर कदम-कदम पर नियमों की धज्जियां उड़ाईं।
शिकायतकर्ता एवं समिति के पुराने सदस्य शीशपाल ने बताया कि उन्होंने लखनऊ में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों से एक साल पहले इस मामले की शिकायत की थी। इसके बाद मंडलायुक्त ने तीन सदस्यीय कमेटी से जांच कराई।
जांच में सामने आया है कि एक ही व्यक्ति मायानगर सहकारी समिति पर तीन दशकों से काबिज है। समिति की जमीन लोगों को आवास के लिए उपलब्ध होनी चाहिए थी लेकिन समिति के तीन पदाधिकारियों ने योजनाबद्ध तरीके से जमीनें खुर्द-बुर्द कर डालीं। जांच में कई बिल्डरों के नाम भी सामने आए हैं।