मुरादाबाद। सिविल लाइंस के चर्चित कुशांक हत्याकांड में पुलिस नामजद आरोपियों के खिलाफ अब तक कोई सबूत नहीं जुटा पाई। जिस कारण पुलिस की ओर से आरोपियों की कस्टडी रिमांड भी नहीं मांगी गई। नामजद आरोपियों को इससे राहत मिल गई। अदालत ने दोनों को जमानत बंधपत्र (बेल बांड) पर रिहा करने के आदेश दे दिए हैं। तीन महीने बाद दोनों भाई सलाखों से बाहर निकल आए हैं।
सिविल लाइंस के रामगंगा विहार कॉलोनी में 12 जनवरी 2022 की रात करीब साढ़े आठ बजे स्पोर्ट्स कारोबारी कुशांक गुप्ता की उनकी ही दुकान के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुशांक के पिता अशोक गुप्ता ने बिजनौर के नूरपुर निवासी हिमांशु गोयल और उसके भाई प्रयांशु गोयल के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया था। जिसमें अशोक गुप्ता ने बताया कि उनके बेटे कुशांक गुप्ता का हिमांशु और प्रयांशु से विवाद चल रहा था। इसी विवाद में हत्या की गई है।
पुलिस ने दोनों भाइयों को गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था। तब से ही आरोपियों के परिजन पुलिस अफसरों से मिलकर इस मामले में निष्पक्ष जांच कराने की मांग कर रहे थे। पुलिस ने भी तीन माह तक इस मामले की विवेचना की। इन तीन माह में नामजद आरोपियों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिल पाए। पुलिस ने दोनों आरोपियों की कस्टडी की भी मांग भी नहीं की गई। साथ ही ये भी पुलिस की ओर से बताया गया कि इस केस की जांच जारी है, लेकिन अब तक हिमांशु और प्रयांशु के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिल पाया है।
आरोपियों ने अपने अधिवक्ता की मदद से कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों भाइयों को जमानत बंधपत्र (बेल बांड) रिहा करने के आदेश दिए। दोनों भाई तीन माह बाद जेल से बाहर आ गए हैं।
कुशांक हत्याकांड की जांच जारी है। अब तक जांच में नामजद आरोपियों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिल पाया है। जिस कारण दोनों की कस्टडी नहीं मांगी गई थी। दोनों भाइयों को बेल बांड मिली है।
सागर जैन, एएसपी
आरोपियों के जेल से रिहा होने की मुझे कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा हुआ है तो गलत है। पुलिस ने इस मामले में अब तक न तो कोई साक्ष्य जुटा पाई और न ही चार्जशीट दाखिल की। इस मामले में कोर्ट की शरण में जाएंगे।
अशोक गुप्ता, कुशांक गुप्ता के पिता