मुरादाबाद। पर्यटकों को लुभाने के लिए रामपुर रोड पर रामगंगा नदी के किनारे डेढ़ दशक पहले स्थापित किया गया डियर पार्क वन विभाग के कर्मचारियों, अधिकारियों की उदासीनता के कारण बदहाल हो चुका है। रेस्क्यू के बाद यहां तार के बाड़ों में रखे गए छह हिरणों के लिए न तो समुचित चारे-पानी की व्यवस्था है और न ही पर्यटकों के लिए सुविधा। पार्क के झूले टूट चुके हैं, हरियाली भी दम तोड़ रही है।
डियर पार्क की स्थापना के बाद इसे ईको टूरिज्म के रूप में विकसित करने का निर्णय भी लिया गया, लेकिन अमल आज तक नहीं हुआ। कभी खूबसूरती के लिए जाना जाने वाला यह पार्क अब उजड़ेपन के कारण डरावना लगने लगा है। रामपुर रोड पर शहर के प्रवेश द्वार पर रामगंगा के किनारे करीब 64 हेक्टेयर वनक्षेत्र है। इसके करीब 20 एकड़ क्षेत्र में इस पार्क की स्थापना की गई है।
इसमें करीब एक हेक्टेयर क्षेत्र की तार फेंसिंग कर वन विभाग द्वारा विभिन्न स्थानों से रेस्क्यू कर लाए गए हिरणों आदि की देखभाल व उपचार के लिए बाड़ा बनाया गया है। पर्टयकों को आकर्षित करने के लिए शुरू में इस क्षेत्र में खरगोश का बाड़ा भी बनाया गया था। बाड़े के अंदर छोटे तालाब भी बनाए गए हैं। जिसमें शुरू में जलीय जंतु भी पाले गए थे। बोटिंग के लिए बाड़े के पास झील भी बनाई गई थी।
बच्चों के मनोरंजन के लिए विभिन्न प्रकार के झूले भी लगाए गए थे। पर्यटकों के बैठने के लिए जगह-जगह बेंचें और हट भी बनाई गई थीं। एमडीए के सौजन्य से चहारदीवारी और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की ओर से लोगों को वन्य जीवों की जानकारी देने के लिए वन चेतना केंद्र की स्थापना भी की गई, लेकिन अब यह सभी बदहाल हैं। हिरनों के बाड़े की घास देख-रेख के अभाव में सूख गई है।
वन विभाग द्वारा दो महिलाएं उनके लिए चारे की व्यवस्था को लगाई गई हैं। यह महिलाएं ही वहां स्थित नर्सरी में उनके लिए उगाए गए चारे को काट कर सुबह शाम बाड़े में डालती हैं।