मुरादाबाद में गिरफ्तार आरोपी
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12 साल से मैचों पर सट्टा लगवा रहा गिरोह
एसपी सिटी ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि आरोपी शहर के बड़े-बड़े बुकी के संपर्क में थे। बुकी से मास्टर आईडी का लिंक लेकर ऑनलाइन सट्टा लगवा रहे थे। आरोपी 12 साल से आईपीएल मैचों में सट्टा लगवा रहे हैं। पुलिस का दावा है कि अब तक आरोपी करोड़ों रुपये का सट्टा लगवा चुके हैं। आरोपी एक मैच में चार तरीके से सट्टा लगवाते थे। मैच की हार-जीत के अलावा प्रत्येक ओवर का भी सट्टा लगवाते थे। हर मैच में लगाए गए सट्टे की रकम की रिकवरी रोजाना की जाती थी।
खिलौना फैक्टरी संचालक ने पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष संग बनाया गिरोह
सीओ सिविल लाइंस कुलदीप गुप्ता ने बताया कि कोतवाली क्षेत्र के जीएमडी रोड जवाहर मार्केट निवासी कौशल कपूर की कांठ रोड पर खिलौना बनाने की फैक्टरी है। सेंट पॉल स्कूल रोड पर पीटीसी के पास कौशल कपूर का फ्लैट है। उसने सट्टा लगवाया का गिरोह चलाने के लिए फ्लैट को अपना ठिकाना बनाया था।
हिंदू काॅलेज के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सुशील चौधरी, अभिनव, मनोज अरोरा, धमेंद्र कुमार, रोहित गुप्ता और हेमंत कुमार पार्टनर के रूप में काम कर रहे थे। विपुल जुआल और मोहम्मद शहजादे सलीम कौशल के कर्मचारी हैं। यह दोनों ही ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टे का रिकार्ड तैयार करते हैं।
आरोपियों ने उगले बड़े नाम, कई जिलों में फैला है नेटवर्क
आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में शहर के कई बड़े बुकी के नाम बताए हैं। एसपी सिटी ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि महानगर में रहने वाले अमित नागपाल, कमलदीप टंडन, राजदीप टंडन, मुकुल गोटेवाला, आशु रस्तोगी, विशाल डुडेजा, रचित रस्तोगी, सुमित उर्फ सन्नी सेठी, टीटू उर्फ दीपक गगनेजा, विक्की छाबडा, कमल छावड़ा बड़े बुकी हैं।
इन लोगों की लग्जरी लाइफ देखकर ही आरोपियों ने आईपीएल में सट्टा लगवाने के लिए गैंग बना लिया था। आरोपी कौशल कपूर और विपुल जुआल बड़े बुकी की मास्टर आईडी खरीद लेते हैं। इसके बाद इनके गिरोह में जुड़े लोग गोलू, अजय, आलोक, लवली, अलिंद, निल्ली, गुड्डू, शहजादे समेत अन्य साथियों के जरिये लोगों से मैच पर सट्टा लगवाते हैं। इस गिरोह का नेटवर्क हापुड़, रामपुर, संभल, अमरोहा, बिजनौर, मेरठ और अन्य जिलों तक जुड़ा है।
10 लाख से एक करोड़ तक बिकती है मास्टर आईडी
आईपीएल में सट्टा लगवाने के लिए मास्टर आईडी दस लाख से एक करोड़ तक में बिकती है। शहर के बड़े बुकी कोलकाता, मुंबई, दिल्ली से इस आईडी को खरीद लेते हैं। इसके बाद वह अपने नीचे वालों को बेचते हैं। लोगों को एक्सेस देकर उनसे सट्टा लगवाते हैं। सट्टे के रुपये का लेनदेन ऑनलाइन खातों में और नकद दोनों तरह से होता है।