मुरादाबाद। कहने को तो नया मुरादाबाद है, जिसे शुरू करते समय एमडीए ने सुविधाओं के बड़े बड़े दावे किए थे लेकिन यहां के हालात तो बहुत ही बुरे हैं। सेक्टर तीन में न तो सीवर संचालित है और न ही ओवरहेड टैंक से घरों तक पीने का पानी पहुंचता है, न कभी कोई सफाई कर्मचारी आता है। यहां के लोग सिर्फ अपनी व्यवस्था पर जीते हैं। सड़कें बदहाल हो चुकी हैं, खाली प्लॉटों की लंबी झाड़ियों में नीलगाय घूमती हैं और मैनहोल खुले पड़े हैं। जिससे हमेशा खतरा बना रहता है।
एमडीए ने करीब 25 साल पहले नया मुरादाबाद के नाम से बड़ी योजना शुरू की थी। कहीं प्लॉटिंग की तो कहीं फ्लैट बनाए। सीवर लाइन डाली, पेयजल के लिए ओवरहेड टैंक भी बनाए। सड़कें और पार्क बनाए लेकिन एक बार बनाकर भूल गए। इसके बाद पलटकर नहीं देखा कि करोड़ों की लागत से विकसित सुविधाएं संचालित हैं या नहीं। उनका लाभ लोगों को मिल रहा है या नहीं। इनकी मरम्मत सिर्फ अभिलेखों में ही होती है, अफसरों ने कभी भौतिक सत्यापन भी नहीं किया, परिणाम यह है कि इसी में शामिल सेक्टर तीन की व्यवस्था भी चौपट हो गई। जिसका खामियाजा स्थानीय वाशिंदों को भुगतना पड़ रहा है।
खुले पड़े मैनहोल में गिर जाते हैं पशु
- नया मुरादाबाद के सेक्टर तीन में सीवरलाइन तो बंद ही है लेकिन इसके सभी मैनहोल खुले पड़े हैं। पिछले पांच सालों में करीब 50 से अधिक नील गाय, गाय व कुत्तों के बच्चे इनमें गिरे हैं, जिन्हें स्थानीय लोगों ने निकाला है, कई तो मर गए।
डॉ.सत्यवीर सिंह चौहान।
सड़कें खत्म, गिरकर चोटिल हो रहे लोग
- एमडीए ने यह परियोजना वर्ष 2000 में लॉन्च की, उसी समय सड़कें बनाई थीं, इसके बाद एक बार भी सड़कों की मरम्मत नहीं कराई है, जिसके कारण सड़कें लगभग खत्म हो गईं हैं, लोग अक्सर गिरकर चोटिल हो रहे हैं, एक व्यक्ति तो परसों ही गिरे हैं, जिनकी टांग टूट गई, अभी अस्पताल में हैं।
डॉ.रितुराज यादव।
सीवरलाइन देखरेख के अभाव में बंद है
-सीवरलाइन तो डाली गई है लेकिन वह तभी से बंद पड़ी हैं, उसके ढक्कन टूट चुके हैं। जिससे यहां की जलनिकासी की कोई व्यवस्था नहीं है, किसी तरह बंद सीवरलाइन में ही पानी बहा दिया जाता है। बारिश के दिनों में दिक्कत बढ़ जाती है, क्योंकि सीवरलाइन का भी पानी आगे नहीं जाता।
-अरविंद कुमार।
गड्ढे में एकत्र करके जलाते हैं कूड़ा
- सेक्टर तीन में सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। स्थानीय लोग तीन चार दिन का कचरा एक गड्ढे में एकत्र करते हैं और उसके बाद उसे जला देते हैं। वर्षो से कूड़ा निस्तारण की यही विधि यहां अपनाई जाती है, क्योंकि एमडीए की ओर से कोई भी कर्मचारी कूड़ा उठाने के लिए आता ही नहीं है।
- सुनील कुमार चौहान।
ख्राली प्लॉटों में उगे जंगल में घूमती हैं नील गाय
- सबसे बड़ी समस्या है कि एमडीए की ओर से यहां सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। यही कारण है कि जगह जगह झाड़ियां हैं, खाली प्लॉटों में जंगल उग आया है, दिन में ही नील गाय घूमती हैं। जिसके कारण बच्चों व खासकर महिलाओं को देर सवेर बाहर निकलने में भय लगता है।
-सीमा
बिजली के खंभों में उतरता है करंट
- पेड़ों की कभी ट्रिमिंग नहीं होती है, बारिश के दिनों में पेड़ों पर करंट आ जाता है, लाइनें खराब हैं, बिजली खंभों पर करंट दौड़ता है। पिछले दिनों एक सांड करंट की चपेट में आकर मर चुका है। इसके बाद स्थानीय लोगों ने आवासों के किनारे वाले बिजली के खंभों में प्लास्टिक सीट चिपकाई है।
-सुनीत कुमार शर्मा।
आए दिन होती रहती है चोरी
- सेक्टर में कोई भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। अक्सर यहां चोरियां होती रहती हैं, जिसके कारण लोगों को हमेशा् ही भय बना रहता है, बाहर भूल से भी कुछ छूट जाए तो चोरी हो जाता है। अपना मकान छोड़कर कहीं जाने आने में डर लगा रहता है। एमडीए का कोई गाड़ भी यहां तैनात नहीं है।
कमल सिंह।
यहां नहीं आता ओवरहेड टैंक का पानी
- सेक्टर तीन का ओवरहेड टैंक सेक्टर सात में बना है लेकिन आज तक चालू नहीं हो पाया है। यहां एमडीए का पीने का पानी नहीं आता है, सभी भवन स्वामियों को अपना सबमर्सिबल लगवाना पड़ा है। यदि कोई प्लॉट पर भवन बनाता है तो पहले सबमर्सिबल लगवाता है। पानी न होने से बड़ी दिक्कत है।
-बोधल सिंह।
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वर्जन
- - नया मुरादाबाद में जहां भी सेक्टर बसे हैं या फ्लैट हैं, वहां एमडीए की ओर से सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं, यदि कहीं किसी तो दिक्कत हैं तो लिखित शिकायतें करें, समाधान करा दिया जाएगा।
-संजय सत्संगी, डीआईपीआरओ, एमडीए।