मुरादाबाद। जिला अस्पताल में मरीजों को न तो छालों के लिए बीटाडीन मरहम मिल रहा है और न दिमाग की दवा। मरीज अस्पताल में आकर भटक रहे हैं। दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन का दावा है कि दवाओं की कोई कमी नहीं है।। जबकि वास्तविकता यह है कि मरीजों को विटामिन डी-3 के सीरप या पाउच तक नहीं मिल रहे हैं। पेशाब में जलन के लिए कुछ मरीजों को सीरप नहीं मिला।
दिमाग के मरीजों पर इन दिनों दोहरी मार पड़ रही है। अस्पताल में दो महीने से मानसिक रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को न तो दवा मिल रही है और न ही परामर्श। किसी को दवा बदलवानी है तो उसके पास निजी अस्पताल में जाने के अलावा कोई चारा नहीं है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सप्ताह में तीन दिन ओपीडी चलती है, जिसमें काउंसलर बैठते हैं डॉक्टर नहीं। मंगलवार को भी मानसिक रोग अस्पताल में परामर्श और दवा के लिए भटकते रहे। कई डॉक्टर ऐसे भी हैं जो आंख में डालने की दवा भी बाहर से लिख रहे हैं। इसके लिए मरीजों को अस्पताल के पर्चे पर परामर्श नहीं लिखा जा रहा बल्कि छोटी पर्ची अलग से पकड़ा दी जाती है। इसी तरह एक महिला मरीज ने दिमाग में दर्द की शिकायत बताई तो उन्हें पर्चे पर लिखी पेन किलर दवा अस्पताल में थमा दी गई। दिमाग की जो दवा पर्चे पर लिखी थी, उसके लिए स्टाफ ने कहा दिया कि यह बाहर मिलेगी। यह दवाएं अस्पताल के जन औषधि केंद्र पर भी नहीं मिल पा रही हैं। जबकि अस्पताल में यह केंद्र इसीलिए खुला है कि मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर पर न जाना पड़े।
मरीजों से बातचीत (फोटो)
मैं मैनाठेर से आया हूं। मेरे दोनों कंधों में बहुत दर्द है। डॉक्टर ने पर्चे पर जो दवा लिखी है उसमें से दर्द का ट्यूब नहीं मिला है। अब मजबूरी में बाहर से लेना पड़ेगा।
- आले हसन
मैं खुशहालपुर का रहने वाला हूं। मेरी आंखों में परेशानी है। डॉक्टर साहब ने जो दवा लिखी है उसके लिए पहले ही बता दिया कि यह बाहर से मिलेगी। यहां के लिए उन्होंने कोई दवा नहीं लिखी है।
- अमित कुमार
मेरे मुंह में छाले हो गए हैं। डॉक्टर ने एक करारे करने के लिए एक लिक्विड लिखा है, जो यहां नहीं मिल रहा है। दवा के काउंटर पर जो स्टाफ हैं उन्होंने कहा है कि बाहर मेडिकल से ले लो।
- नाजिया
मेरे दिमाग में अक्सर दर्द होने लगता है। मानसिक रोग विशेषज्ञ से मेरी दवा चलती है आज अस्पताल में केवल पेन किलर मिली है। मानसिक रोग की दवा बाहर से लेने के लिए कहा है।
- साजिया
मैं लाइनपार में रहता हूं। एक एक्सीडेंट में मेरे चोट लग गई। अब यहां दर्द का ट्यूब नहीं मिल रहा है। काम छोड़कर कल दोबारा आना पड़ेगा या फिर बाहर से दवा खरीदनी पड़ेगी।
- मन्नू
मैं हसनपुर से आया हूं। मेरे पेट में दर्द रहता है और सीने पर जलन होती है। डॉक्टर ने पर्चे ने एक सिरप लिखा है, वह अस्पताल में नहीं मिल रहा। कर्मचारी कह रहे हैं कि बाहर से खरीद लो।
- मो. फईम
मेरे गले में कई दिन से छाले हो रहे हैं। कल्याणपुर से दवा लेने यहां आया हूं। गरारे करने वाली दवा यहां नहीं मिल रही है। अब बाहर किसी मेडिकल से ही खरीदनी पड़ेगी।
- अमित कुमार यादव
मैं टांडा बादली से आया हूं। पेशाब में जलन होती है। दवा के साथ डॉक्टर साहब ने सीरप भी लिखा है लेकिन काउंटर से नहीं मिला। यहां के कर्मचारी कह रहे हैं कि कल आ जाना, सीरप मिल जाएगा।
- मो नईम
मेरी पत्नी सलमा को दिमाग की बीमारी है। हम संभल से यहां दवा लेने आए हैं। यहां केवल दर्द की दवा मिली है बाकी बीमारी की जो मुख्य दवा है वह बाहर से लेनी पड़ेगी। यहां आने का कोई फायदा नहीं हुआ।
- अजहर
-
वर्जन
अस्पताल में दवाओं का पर्याप्त स्टॉक है। यदि किसी को दवा नहीं मिल रही है तो वह हमारे पास आकर शिकायत कर सकते हैं। हम संबंधित स्टाफ से कारण पूछेंगे। जो डॉक्टर बाहर की दवा लिख रहे हैं, उन्हें जवाब देना होगा। डॉक्टरों की गलती पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. संगीता गुप्ता, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक