पंडित नगला में सफाई कर्मियो के इंटरव्यू के दौरान नाले की सफाई करते सफाई कर्मी और बाहर रखे ब्रांडेड कपड़े और जूते।
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वैसे तो ये मजबूरी का मामला है जो ये इंजीनियर सफाई कर्मियों की नौकरी की लाइन में खड़े हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इन लोगों ने न तो इंजीनियरिंग की पढ़ाई सही से की और न ही ये सफाई सही से करवा पाएंगे। अगर इन लोगों ने पढ़ाई की होती तो आज नौकरी के लिए कतार में नहीं खड़ा होना पड़ता।
इस नौकरी के लिए तो नहीं दिलाया होगा इनके घर वालों ने इन्हें बीटेक में दाखिला। सामान्य घरों के मां - बाप ने बेटे की मोटी बीटेक फीस चुकाते वक्त जरूर ख्वाब देखा होगा कि बेटा इंजीनियर बनकर विदेश में नौकरी करेगा।शूट - बूट पहनकर घर लौटेगा। लेकिन यहां तो तस्वीर ही उलटी है।
घर वालों ने तो फर्ज निभा दिया पर ये पढ़कर नहीं दिए। जुगाड़ से बीटेक की डिग्री तो हासिल कर ली लेकिन नौकरी हासिल नहीं कर सके। कहीं काम नहीं मिला तो मंगलवार को नगर निगम में सफाई कर्मी की नौकरी मांगने पहुंच गए। लेकिन जब इंटरव्यू से पहले नाला सफाई का टेस्ट हुआ तो जुगाड़ वाले इंजीनियर उसमें भी फेल हो गए।
नगर निगम में इस वक्त 1083 सफाई कर्मियों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए 58909 लोगों ने आवेदन किया है। आवेदकों में बड़ी संख्या में ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट तो हैं ही प्रोफेशनल डिग्रीधारी कई युवाओं ने भी सफाई कर्मी की नौकरी के लिए आवेदन किया है। इनमें कई बीटेक और बीसीए वाले भी हैं।
मंगलवार से इनकी इंटरव्यू प्रक्रिया शुरू हो गई। पहले दिन ढाई सौ आवेदकों का इंटरव्यू था। इनमें एक बीटेक डिग्रीधारी और एक पालीटेक्निक डिप्लोमा धारी भी था। इंटरव्यू से पहले सभी आवेदकों को पंडित नंगला बाईपास पर नाले की सफाई करने का टास्क दिया गया। आवेदक एक - एक कर नाला सफाई करने के लिए नाले में कूदने लगे।
बीटेक और डिप्लोमा डिग्रीाधारी भी नाले में उतरे लेकिन नाला साफ नहीं कर पाए और कुछ मिनट में ही नाला कूदकर मौके से खिसक गए। बाद में इन्होंने इंटरव्यू प्रक्रिया में भी हिस्सा नहीं लिया। निगम अफसरों का कहना है कि कुछ लोग इस उम्मीद में सफाई कर्मी की नौकरी पाने आ जाते हैं कि बाद में जुगाड़ कर लेेंगे और सफाई नहीं करनी पड़ेगी।