मुरादाबाद। जिले में आठ ब्लॉकों में 2700 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें से महज 58 प्रतिशत केंद्रों पर वजन मशीन है। कई केंद्रों की स्थिति यह है कि बच्चों का वजन व लंबाई मापने के लिए कोई साधन नहीं हैं। ऐसे में कुपोषित बच्चों के चिह्नांकन में लापरवाही बरती जा रही है। इससे डैश बोर्ड पर जिले के स्वास्थ्य विभाग की स्थिति भी प्रभावित हो रही है।
जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में डीएम से सीडीओ तक बाल विकास विभाग को उपकरण खरीदने के लिए चेता चुके हैं। इसके बावजूद कुछ ब्लॉकों में इनफेंटोमीटर और स्टेडिओमीटर की भारी कमी है। ताजपुर व देहात ब्लॉक की स्थिति ज्यादा खराब है। जिले में सैम मोबिलाइजेशन का आंकड़ा भी कमजोर है। सैम मोबिलाइजेशन का मतलब है गंभीर कुपोषण वाले बच्चों की पहचान करने, उन्हें रेफर करने और उनका इलाज करने की कम्युनिटी-बेस्ड प्रक्रिया। यह बच्चों की मृत्यु दर और बीमारी को कम करने के लिए एक मुख्य रणनीति है। इसमें आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर स्क्रीनिंग करते हैं। वेट-फॉर-हाइट/लेंथ, जेड-स्कोर, मिड-अपर आर्म सरकमफ्रेंस जैसे माप का इस्तेमाल करते हैं। यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक जिले में यह कार्य पिछड़ रहा है। मुरादाबाद देहात ब्लॉक में लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 18 प्रतिशत कुपोषित बच्चों की स्क्रीनिंग हुई है। डिलारी ब्लॉक में सिर्फ 20 प्रतिशत बच्चों की स्क्रीनिंग की गई है।
यह स्थिति तब है जबकि जिले में हर माह लगभग 2000 बच्चे कुपोषित चिह्नित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के जानकारों का कहना है कि यदि हर आंगनवाड़ी केंद्र पर उपकरण उपलब्ध हों तो स्क्रीनिंग अधिक गंभीरता से हो सकेगी। ज्यादा परिवारों को इसका लाभ मिलेगा और कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर उन्हें पोषण दिया जा सकेगा।
जिले के विभिन्न ब्लॉकों में आंगनवाड़ी केंद्रों पर उपकरणों की स्थिति
ब्लॉक का नाम वजन मशीन इनफेंटोमीटर स्टेडियोमीटर सैम मोबिलाइजेशन
कांठ 80 प्रतिशत 92 प्रतिशत 92 प्रतिशत 70 प्रतिशत
डिलारी 38 प्रतिशत 69 प्रतिशत 81 प्रतिशत 20 प्रतिशत
कुंदरकी 71 प्रतिशत 75 प्रतिशत 63 प्रतिशत 67 प्रतिशत
ताजपुर 50 प्रतिशत 60 प्रतिशत 20 प्रतिशत 40 प्रतिशत
मुरादाबाद देहात 57 प्रतिशत 72 प्रतिशत 46 प्रतिशत 18 प्रतिशत
नोट- इनफेंटोमीटर का मतलब शिशु की लंबाई मापने का उपकरण और स्टेडियोमीटर का अर्थ पांच साल तक के बच्चों की लंबाई मापने का यंत्र है।
00
जिन केंद्रों पर उपकरण उपलब्ध नहीं हैं वहां दूसरे केंद्र की आंगनवाड़ी कार्यकत्री अपने केंद्र के उपकरण देकर सहयोग करती हैं। इससे बच्चों का सही चिह्नांकन हो जाता है। ग्राम पंचायतों के सहयोग से नए उपकरणों की खरीद की जाएगी। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
- शैलेंद्र कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी