मुरादाबाद। जनपद न्यायालय में शनिवार को इस वर्ष की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की गई। जनपद न्यायाधीश सैय्यद माऊज़ बिन आसिम ने लोक अदालत का शुभारंभ किया। अदालत में 2 लाख 13 हजार 557 मामलों का आपसी सुलह समझौता के आधार पर निपटारा किया गया।
न्यायालयों ने 23250 वादों का निस्तारण किया जबकि प्रशासन द्वारा 189014 मामले निपटाए गए। बैंकों ने भी 1293 ऋण संबंधी वादों का समाधान किया। शनिवार सुबह से ही जिला न्यायालय परिसर में वादकारियों की लंबी कतारें लग गई थीं। बैंक ऋण, यातायात चालान और बिजली बिल बकाया जैसे मामलों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
प्राधिकरण की सचिव तपस्या त्रिपाठी ने बताया कि लोक अदालत में 22163 शमन योग्य वादों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में 5 लाख 58 हजार 970 रुपये का अर्थदंड लगाया गया। वैवाहिक और भरण पोषण से संबंधित 62 मामले आपसी सुलह-समझौते से निपटाए गए। उत्तराधिकार का एक मामला निस्तारित हुआ। इस एक मामले में 15 लाख 47 हजार 186 रुपये के प्रमाण-पत्र जारी किए गए। मोटर वाहन दुर्घटना प्रतिकर के 56 मामलों में पीड़ितों को 5 करोड़ 83 लाख 37 हजार रुपये देने के आदेश दिए गए।
विभिन्न बैंकों से संबंधित 1293 ऋण संबंधी मामले भी निस्तारित हुए। इन बैंक ऋण मामलों से 2 करोड़ 99 लाख 69 हजार 323 रुपये की वसूली की गई। इसके अतिरिक्त, लघु प्रकृति के लेबर एक्ट और मोटर वाहन अधिनियम संबंधी मामले भी निपटाए गए। जनपद न्यायाधीश सैय्यद माऊज़ बिन आसिम ने बताया कि लोक अदालत आपसी सुलह-समझौते से मामलों का त्वरित निस्तारण करती है। इससे आम लोगों को न्याय मिलने में सुविधा होती है और लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचा जा सकता है। लोक अदालत के माध्यम से समय और धन दोनों की बचत होती है।
इस दौरान प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय सुनित चंद्रा, पीठासीन अधिकारी एमएसीटी संजय कुमार, पीठासीन अधिकारी लारा जैगम उद्दीन, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत मो.फिरोज, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्वेता चौधरी समेत अन्य न्यायिक अधिकारी और दि बार एसोसिएशन एंड के अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता और अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।