मुरादाबाद। इस साल की अंतिम राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को सात घंटे में आपसी सुलह समझौते के आधार पर दो लाख से ज्यादा वादों का निस्तारण किया गया। इस दौरान अलग अलग अदालतों ने पीड़ितों को 9.27 करोड़ रुपये का मुआवजा भी दिलवाया। वादों का निस्तारण होने पर वादकारियों के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
शनिवार की सुबह करीब दस बजे राष्ट्रीय अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश सैय्यद माऊज बिन आसिम ने किया। इसके बाद अदालतों में बैंक ऋण विवाद, यातायात चालान, बिजली बिल बकाया और अन्य शमन योग्य मामलों का निस्तारण किया गया। अपर जिला जज एवं राष्ट्रीय लोक अदालत के सचिव मो. फिरोज ने बताया कि 21 हजार 727 शमन योग्य वादों का निस्तारण किया गया। इस मामलों में 7.86 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया। वैवाहिक एवं भरण-पोषण से संबंधित 25 मामलों का निस्तारण परिवार न्यायालय और अपर परिवार न्यायालय में दोनों पक्षों की आपसी सहमति से कराया गया। उत्तराधिकार से जुड़े पांच मामलों का निस्तारण कर 50.31 लाख रुपये के प्रमाणपत्र जारी किए गए।
मोटर वाहन दुर्घटना प्रतिकर के 101 मामलों में पीड़ितों और उनके परिजनों को 9.27 करोड़ रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए गए। बैंकों के 1235 ऋण संबंधी मामलों का निस्तारण करते हुए 2.49 करोड़ रुपये की वसूली कराई गई। सात घंटे चली राष्ट्रीय लोक अदालत में 2.02 लाख वादों का निस्तारण कर 9.27 करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाया गया है। इस दौरान प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय सुनीत चंद्रा, पीठासीन अधिकारी एमएसीटी संजय कुमार, पीठासीन अधिकारी लारा जैगम उद्दीन, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत निरंजन कुमार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्वेता चौधरी, दि बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी के अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता भी मौजूद रहे।
राष्ट्रीय लोक अदालत से जनता को मिल रहा सुलभ, सस्ता और त्वरित न्याय: जिला न्यायाधीश
मुरादाबाद। जिला जज सैयद मऊज बिन आसिम ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का मंच न्याय को आम जनता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है। लोक अदालत में आपसी सुलह-समझौते के आधार पर मामलों का त्वरित निस्तारण किया जा रहा है। इससे आम लोगों को सुलभ, सस्ता और त्वरित न्याय मिल रहा है।