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जनता पर कहर, खोद कर छोड़ दिया शहर

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मुरादाबाद। नाकाम सरकारी तंत्र और जनता की बेबसी का शायद ही इससे बड़ा दूसरा कोई उदाहरण हो। मुरादाबाद शहर में सीवर लाइन के लिए पूरा शहर खोद डाला गया है पर काम है कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। जो काम दो साल में पूरा होना था, वह आठ साल में भी पूरा नहीं हो पाया है। जनता हलाकान होकर रह गई है और हाकिमों को मानाें कोई सरोकार नहीं रह गया है। हालांकि अब फिर से यह वायदा किया जा रहा है कि मार्च के महीने में काम पूरा हो जाएगा।
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वर्ष 2011 में केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना के तहत मुरादाबाद शहर में 233.25 किलोमीटर सीवर लाइन बिछाने का प्रस्ताव मंजूर हुआ था। निगम क्षेत्र में यह लाइन डालने का जिम्मा जल निगम को मिला। निगम ने उसी साल यह काम कार्य दायी संस्था एलएंडटी को सौंप दिया। हैरत की बात यह रही कि दो साल बाद तक तो यह काम शुरू भी नहीं हो पाया जबकि वर्ष 2013 तक तो इस काम को पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था। विडंबना यह है कि 279 करोड़ रुपये की लागत वाला यह कार्य अब तक भी पूरा नहीं हो पाया है। उधर कार्य दायी संस्था ने जहां काम पूरा कर भी दिया तो वहां सड़क नहीं बनाई। उसे खोदकर ही छोड़ दिया गया। पूरा शहर इस समय बदहाल स्थिति में है। लोगों को भारी मुसीबतों सामना करना पड़ रहा है।
दुर्घटना की इंतजार में हाकिम
एकता द्वार जैन मंदिर रोड, नवीन नगर, सिविल लाइन, कजरी सराय, तहसील स्कूल, बारादरी, इकबाल बिल्डिंग रोड, ईदगाह रोड, कटघर थाना मार्ग, कैप्टन सिनेमा रोड, घास मंडी और दीवान का बाजार आदि स्थान ऐसे स्थान हैं जहां कहीं भारी गड्ढे हैं तो कहीं सड़क धंस गई है। लाइन डालने के बाद इस तरह कमजोर सड़क बनी कि वह धंस गई। अब यहां लोग फंस रहे हैं। लोगों के वाहन इन सड़कों में फंस जाते हैं। यदि इन गड्ढों में कोई बच्चा, बड़ा, पशु आदि गिर जाए और अनहोनी हो जाए तो कौन जिम्मेदार होगा। शायद सरकारी महकमे इसी के इंतजार में हैं।
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बहानेबाजी तमाम, कह रहे अब खत्म कर देंगे काम
इस काम के लिए जल निगम और एलएंडटी अधिकारी तमाम दावे कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि पहले तो दो साल पीडब्ल्यूडी ने सड़क किनारे खुदाई की इजाजत ही नहीं दी। कुछ अवैध कब्जों के चक्कर में अदालती कार्रवाई के चलते भी देरी हुई। बहरहाल, अब हाकिम दावा कर रहे हैं कि काम इस बार जरूर पूरा कर देंगे। जल निगम अधिशासी अभियंता अरुण कुमार त्यागी का दावा है कि 31 मार्च तक यह काम पूरा हो जाएगा। मात्र छह किमी काम बाकी रह गया है।
महापौर भी लाचार, जनता किससे करे गुहार
नगर निगम के मेयर विनोद अग्रवाल भी इस मामले में बेबसी जता रहे हैं। उन्होंने कहा कि जल निगम मनमानी कर रहा है। जहां चाहता है वहां सड़क खोद कर छोड़ देता है। इससे लोग परेशान हो रहे हैं। नगर निगम के अंडर में जल निगम नहीं आता है। इसलिए उनका उस पर नियंत्रण भी नहीं है। वह डीएम, कमिश्नर के साथ-साथ कुछ दिन पहले आए प्रभारी मंत्री के सामने भी वह शहर के लोगों की समस्या उठा चुके हैं। तब जल निगम के अधिकारियों को फटकार भी लगी थी पर बात कुछ बनी नहीं।
....इसलिए है यह सीवर लाइन जरूरी
इस लाइन से शहर की लगभग पांच लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित हो रही है। लगभग एक लाख से ज्यादा घरों के लिए यह लाइन शहर के लिए बेहद जरूरी है। लाइन न होने के कारण बारिश में न केवल शहर में भारी जलभराव होता बल्कि प्रदूषित पानी नालों से होते हुए ही रामगंगा में गिर रहा है। इससे शहर का भूगर्भ जल भी प्रदूषित हो रहा है।
शहर में 227 किलोमीटर सीवर लाइन बिछाने का काम पूरा कर लिया गया है। मात्र छह किमी सीवर लाइन और बिछानी है। कार्य के दौरान कभी किसी के न्यायालय चले जाने तो कभी किसी स्थान पर कार्य के लिए अनापत्ति लेने में देरी लगने के कारण समय से कार्य में देरी हो रही है। काम शहर के व्यस्त इलाकों में चल रहा है। इसलिए शहर के लोगों को दिक्कत कुछ अधिक महसूस हो रही है। मार्च तक कार्य पूरा हो जाएगा।
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अरुण कुमार त्यागी, अधिशासी अभियंता जल निगम
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