90 दिन में ग्राहक से मिलता है भुगतान
गगन दुग्गल ने कहा कि निर्यात की नीतियों के मुताबिक ज्यादातर मामलों में विदेशी ग्राहकों से सामान पहुंचने के 90 दिन बाद भुगतान मिलता है। जबकि लोकल स्तर पर कारीगरों को और घरेलू व्यापारियों को हमें 45 दिन में पेमेंट देना होता है।
निर्यातक ऋषि पुगला ने कहा कि नए नियमों के मुताबिक 45 दिन में भुगतान न करने पर यदि छोटे कारोबारी ने निर्यातक की शिकायत कर दी, तो उसका जीएसटी रिफंड रोक दिया जाएगा। जीएसटी स्लैब में एकरूपता नहीं है। कच्चे माल पर 18 प्रतिशत देना पड़ता है और तैयार माल पर सिर्फ पांच प्रतिशत रिफंड मिलेगा।
नेशनल फ्रेट रेगुलेटरी अथॉरिटी बनाने की मांग
निर्यातक डॉ. रजत सिंघल ने कहा कि कच्चे माल की निरंकुश कीमतों, भारत में कोरियर का काम करने वाली विदेशी कंपनियों व शिपिंग कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए नेशनल फ्रेट रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण दिया कि भारतीय नवरत्न कंपनी कॉन्कॉर ने निर्यातकों पर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट चार्ज लगाया है, जिसका व्यापारियों से कोई लेना देना नहीं है।
निर्यातक नरेंद्र चौधरी ने कहा कि जब ऑर्डर का सीजन होता है, तो कच्चे माल के दाम बढ़ जाते हैं। कुछ दिन पहले पीतल की सिल्ली 200 रुपये की थी, अब 235 रुपये प्रति किलो है।