मुरादाबाद। हकीमपुर के पास मौढ़ा-तैयार झील इन दिनों प्रवासी पक्षियों से गुलजार है। शुक्रवार को कांठ तहसील के राजकीय कॉलेज के छात्र यहां बर्ड वाॅचिंग करेंगे। सीडीओ के निर्देश पर वन विभाग ने देहरादून से दो बर्ड वाॅचर बुलाए हैं। दोनों ने बृहस्पतिवार शाम रो झील व आसपास के क्षेत्र का मुआयना किया और पक्षियों को देखा।
बृहस्पतिवार शाम को 16 प्रजातियों के प्रवासी पक्षी इस झील के टापुओं पर देखे गए। यह पक्षी भारत के विभिन्न इलाकों से यहां आए हैं। यूरेशियन कूट व मूरेन जैसी यूरोपीय व एशियाई नस्लें भी इनमें शामिल हैं। राजकीय विद्यालय के छात्रों के लिए यह अलग ही अनुभव होगा। एमडीए की ओर से इस स्थान को वैटलेंड के रूप में विकसित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। बर्ड वाॅचर अरुण सरकार ने बताया कि वह एक दशक से यह कार्य कर रहे हैं। मौढा-तैया झील को उन्होंने प्रवासी पक्षियों के लिए अनुकूल स्थल बताया। कहा कि बर्फीले इलाकों में सर्दी अत्यधिक होने के कारण चार माह के लिए पक्षी यहां आते हैं।
बर्ड वाॅचर वृंदा बजाज बताती हैं कि यहां पक्षियों की कई ऐसी प्रजातियां हैं जो कम ही देखने को मिलती हैं। मार्च में यह पक्षी यहां से अपने स्थानों के लिए लौट जाएंगे। जिन पक्षियों ने यहां अंडे दिए हैं, उनके बच्चे बड़े होकर उनके साथ जाएंगे। जो पक्षी बूढ़े हो चुके हैं और लंबी दूरी तक नहीं उड़ सकते। वह सभी यहीं रह जाएंगे। परिवर्तन दी चेंज एनजीओ के सहयोग से यह कार्य हो रहा है। बृहस्पतिवार को झील के पास बर्ड वाॅचर्स के साथ एनजीओ के अध्यक्ष कपिल कुमार भी मौजूद रहे।
00
पक्षियों की यह प्रजातियां देखी गईं
- कॉटन पिग्मी गूज
- यूरेशियन कूट
- यूरेशियन मूरहेन
- ब्लैक स्टिल्ट
- स्वांपहेन
- कांस्य पंखों वाला जैकाना
- एशियाई ओपनबिल
- आइबिस
- ग्रे हेरॉन
- शिकरा
- डस्की क्रैग-मार्टिन
00
छात्रों को पर्यावरण, प्रकृति व पक्षियों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए शुक्रवार को सुबह सात बजे मोढ़ा-तैया झील पर बर्ड वॉचिंग का आयोजन किया जा रहा है। इसके लिए दो विशेषज्ञों को बुलाया गया है।
- मृणाली अविनाश जोशी, सीडीओ