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रियलिटी चेक: मुरादाबाद में जरूरत पड़ी तो तलाशते रह जाएंगे एंबुलेंस, दावा सात का पहुंचने में लग रहे 20 मिनट

Thu, 26 Feb 2026 07:35 PM IST
Vimal Sharma शिवम वर्मा, अमर उजाला मुरादाबाद

सार

मुरादाबाद में सरकारी एंबुलेंस सेवा के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर सामने आया है। रिएलिटी चेक में 108 एंबुलेंस को पहुंचने में 20 मिनट से अधिक का समय लगा जबकि तय समय सीमा करीब सात मिनट है।
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एंबुलेंस (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : संवाद
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विस्तार
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एंबुलेंस जैसी आपातकाल सेवा की उपलब्धता और सरकारी दावे में खासा फर्क है। हार्ट अटैक और सिर की गहरी चोट या ज्यादा रक्तस्राव के मामलों में इलाज के लिहाज से एक-एक मिनट कीमती होता है। डॉक्टरी भाषा में गोल्डन पीरियड कहे जाने वाले इस समय के लिहाज से सरकार ने फोन कॉल पर एंबुलेंस की पहुंचने की अवधि तय कर रखी है। जिंदगी बचाने में सेकंडों की देरी भी आड़े न आए, इसीलिए हूटर बजाती एंबुलेंस को फौरन रास्ता देने का नियम है।

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ट्रैफिक लाइट वाले चौराहे के लाल सिग्नल पर भी बिना रुके बढ़ते रहने की छूट है। मुरादाबाद में सरकारी एंबुलेंस पर समय का यह फॉर्मूला सटीक नहीं बैठता। अमर उजाला टीम ने बुधवार को रिएलिटी चेक की तो फोन नंबर 108 से जुड़ी एंबुलेंस को आने में 20 मिनट से ज्यादा का वक्त लगा।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कॉल आने के बाद अधिकतम सात (6.45) मिनट में एंबुलेंस पहुंचने की समयसीमा तय है लेकिन मुरादाबाद में एंबुलेंस का रिस्पांस टाइम तीन गुना ज्यादा सामने आया। जाहिर है यह देरी किसी की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। 

केस एक: 
कांशीरामनगर में अशोक ज्वैलर्स के पास से विवेक ने अपने रिश्तेदार को सरकारी अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 नंबर पर रिंग करके एंबुलेंस बुलाई। पहले जवाब मिला...सभी एंबुलेंस व्यस्त हैं इसलिए समय लग रहा है। मरीज विजय के लिए 20 मिनट इंतजार करना पड़ा लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। इसके बाद तीमारदार अपनी व्यवस्था से उन्हें निजी अस्पताल ले गए। जबकि सरकारी एंबुलेंस कॉल करने के 22 मिनट बाद मौके पर पहुंची। तीमारदार ने दोपहर 3:37 बजे कॉल की थी लेकिन एंबुलेंस 4:01 बजे आई। 

केस दो 
बिशनपुर भीमाठेर वार्ड-20 से नवेद अख्तर ने मरीज रेहाना को अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 नंबर पर रिंग करके एंबुलेंस मांगी। नवेद ने 3:24 बजे कॉल की। असहनीय पेट दर्द के कारण रेहाना को महिला अस्पताल ले जाना था। कॉल के 22 मिनट बाद भी एंबुलेंस सोनकपुर ओवरब्रिज पार कर पाई थी यानी 20 मिनट से ज्यादा लगने पर भी मौके पर नहीं पहुंची। चिंता में घिरे तीमारदार रेहाना को निजी अस्पताल ले जाने को मजबूर हुए।

केस तीन
लाइनपार में रामतलैया से बुधवार दोपहर मरीज हसन को अस्पताल ले जाने के लिए उवैस अहमद ने सरकारी एंबुलेंस के लिए कॉल की। पहले तो मरीज के बताए पते पर पहुंचने में एंबुलेंस स्टाफ को परेशानी हुई। दर्ज रिकॉर्ड के मुताबिक मरीज को लकवे की स्थिति के कारण परिजनों ने ज्यादा इंतजार नहीं किया और 14 मिनट बाद वह उन्हें निजी अस्पताल ले गए। 15 मिनट बाद सरकारी एंबुलेंस मौके पर पहुंची। एंबुलेंस आने का यह समय विभागीय दावे से दोगुना है।

6:45 मिनट का रिस्पांस टाइम औसत के मुताबिक है। शहरी क्षेत्र में 10 मिनट में एंबुलेंस पहुंचने का नियम है। यदि गाड़ी समय से नहीं पहुंची है तो संबंधित स्टाफ से कारण पूछेंगे। बुधवार को निरीक्षण के दौरान एंबुलेंस विभिन्न स्थानों पर तैनात मिली थीं। - डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव, डिप्टी सीएमओ
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यह भी जानें 
  • 30 एंबुलेंस जुड़ी हैं 108 फोन नंबर से  
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