15 साल तक संचालन-रखरखाव की शर्त
परियोजना केवल निर्माण तक सीमित नहीं है। इसमें प्लांट के संचालन और रखरखाव की व्यवस्था भी रखी गई है। 15 वर्ष तक संचालन और रखरखाव का प्रावधान होने से प्लांट बनने के बाद उसके संचालन की जिम्मेदारी भी परियोजना का हिस्सा रहेगी। परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी आधारित पीपीपी मॉडल पर तैयार किया गया है।
परियोजना पूरी होने पर इसका सीधा असर सीवेज प्रबंधन, नदी प्रदूषण नियंत्रण और शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर पड़ने की उम्मीद है। नालों के पानी को अलग-अलग जगहों पर रोककर उपचारित करने की व्यवस्था से रामगंगा में प्रदूषित पानी की सीधी आमद कम होगी।
नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल ने बताया कि इस परियोजना का अगला महत्वपूर्ण चरण कार्यादेश जारी होने के बाद शुरू होगा। इसके बाद नालों की पहचान, इंटरसेप्शन-डायवर्जन नेटवर्क, एसटीपी निर्माण और संबंधित सहायक ढांचे का काम आगे बढ़ेगा।